विस्तृत उत्तर
भागवत कथा से संशय मिटने की बात सप्ताह श्रवण की महिमा में कही गई है। धुंधुकारी की मुक्ति के बाद बताया गया कि सप्ताह श्रवण से भगवान की निकट प्राप्ति होती है और दोषों की निवृत्ति होती है। सूखे बाँस की गाँठों के फटने का उदाहरण देकर कहा गया कि जब कथा के प्रभाव से बाँस की गाँठ टूट सकती है, तब चित्त की गाँठ खुलना आश्चर्य नहीं। आगे स्पष्ट कहा गया है कि सप्ताह श्रवण करने पर हृदय की ग्रंथि भेद दी जाती है, सभी संशय छिन्न हो जाते हैं और कर्म क्षीण होते हैं। यहाँ संशय मिटना केवल जानकारी से नहीं, बल्कि कथा के हृदय में स्थित होने और श्रवण की शुद्धि से जुड़ा हुआ है।
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