शिव ध्यानशिव ध्यान शरीर के किन स्थानों में किया जाता है?शिव ध्यान हृदय, नाभि, कण्ठ, भ्रूमध्य, ललाट और मस्तक जैसे स्थानों में बताया गया है।#शिव ध्यान#हृदय#नाभि
योगस्थानहृदय, नाभि और भ्रूमध्य का योग में क्या महत्व है?हृदय, नाभि और भ्रूमध्य ध्यान और योग-साधना के प्रमुख आंतरिक स्थान बताए गए हैं।#हृदय#नाभि#भ्रूमध्य
श्रीमद्भागवतभागवत पुराण सुनने की इच्छा से क्या होता है?जब सुकृती पुरुष इसे सुनने की इच्छा करते हैं, तब ईश्वर शीघ्र उनके हृदय में आकर बंध जाता है।#भागवत श्रवण#ईश्वर#हृदय
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से संशय कैसे मिटते हैं?सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, समस्त संशय छिन्न होते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।#संशय#भागवत कथा#हृदय
श्रीमद्भागवतसच्ची भक्ति कहाँ रहती है?सनकादि भक्ति से कहते हैं कि वह नित्य वैष्णव भक्तों के हृदय में निवास करे; वहीं कलियुग के दोष उसे स्पर्श नहीं कर सकते।#भक्ति#वैष्णव#हृदय
लोकक्षीरोदकशायी विष्णु कौन हैं?वे हर जीव के हृदय में परमात्मा रूप से स्थित विष्णु हैं।#क्षीरोदकशायी विष्णु#परमात्मा#हृदय
मरणोपरांत आत्मा यात्रातीसरे दिन के पिण्ड से कौन सा अंग बनता है?तीसरे दिन के पिण्ड से हृदय और छाती बनते हैं।#तीसरा दिन#पिण्डदान#हृदय
कुंडलिनीतंत्र में अनाहत चक्र की साधना का क्या प्रभाव होता है?हृदय — 12 दल, हरा, वायु, बीज 'यं'।: 'बहुत सिद्धियां, ब्रह्मांडीय ऊर्जा, सूक्ष्म रूप, आनंद, प्रेम।': 'वासना मुक्ति।': 'प्रेम-करुणा केंद्र।'#अनाहत#चक्र#प्रभाव