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हृदय से जुड़े सभी प्रश्न(8)

हृदय पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 8 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव ध्यान

शिव ध्यान शरीर के किन स्थानों में किया जाता है?

शिव ध्यान हृदय, नाभि, कण्ठ, भ्रूमध्य, ललाट और मस्तक जैसे स्थानों में बताया गया है।

#शिव ध्यान#हृदय#नाभि
योगस्थान

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य का योग में क्या महत्व है?

हृदय, नाभि और भ्रूमध्य ध्यान और योग-साधना के प्रमुख आंतरिक स्थान बताए गए हैं।

#हृदय#नाभि#भ्रूमध्य
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण सुनने की इच्छा से क्या होता है?

जब सुकृती पुरुष इसे सुनने की इच्छा करते हैं, तब ईश्वर शीघ्र उनके हृदय में आकर बंध जाता है।

#भागवत श्रवण#ईश्वर#हृदय
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से संशय कैसे मिटते हैं?

सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, समस्त संशय छिन्न होते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।

#संशय#भागवत कथा#हृदय
श्रीमद्भागवत

सच्ची भक्ति कहाँ रहती है?

सनकादि भक्ति से कहते हैं कि वह नित्य वैष्णव भक्तों के हृदय में निवास करे; वहीं कलियुग के दोष उसे स्पर्श नहीं कर सकते।

#भक्ति#वैष्णव#हृदय
लोक

क्षीरोदकशायी विष्णु कौन हैं?

वे हर जीव के हृदय में परमात्मा रूप से स्थित विष्णु हैं।

#क्षीरोदकशायी विष्णु#परमात्मा#हृदय
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तीसरे दिन के पिण्ड से कौन सा अंग बनता है?

तीसरे दिन के पिण्ड से हृदय और छाती बनते हैं।

#तीसरा दिन#पिण्डदान#हृदय
कुंडलिनी

तंत्र में अनाहत चक्र की साधना का क्या प्रभाव होता है?

हृदय — 12 दल, हरा, वायु, बीज 'यं'।: 'बहुत सिद्धियां, ब्रह्मांडीय ऊर्जा, सूक्ष्म रूप, आनंद, प्रेम।': 'वासना मुक्ति।': 'प्रेम-करुणा केंद्र।'

#अनाहत#चक्र#प्रभाव
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