विस्तृत उत्तर
भागवत कथा से प्रेत मुक्ति का रूप धुंधुकारी के उदाहरण से दिखाया गया है। सूर्यदेव ने गोकर्ण को बताया कि श्रीमद्भागवत से मुक्ति होगी, इसलिए सात दिन उसका पारायण करो। गोकर्ण ने व्यासासन पर बैठकर प्रथम स्कंध से स्पष्ट स्वर में कथा आरंभ की। धुंधुकारी वायु रूप होने से बाहर बैठ नहीं सकता था, इसलिए सात गाँठ वाले बाँस में घुसकर कथा सुनने लगा। प्रत्येक दिन कथा समाप्त होने पर बाँस की एक गाँठ फटती गई। सात दिनों में सातों गाँठें फट गईं और बारह स्कंधों का श्रवण करके धुंधुकारी प्रेत योनि छोड़कर दिव्य रूप में प्रकट हुआ। उसने स्वयं कहा कि गोकर्ण की कृपा से वह प्रेत पीड़ा से मुक्त हुआ।
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