मंत्र विधिप्रेत मुक्ति के लिए कौन सा मंत्र जपें?'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 108 बार, महामृत्युंजय 1,25,000, गीता 15वाँ अध्याय, गरुड़ पुराण पाठ। नारायण बलि + गया पिंडदान = सर्वश्रेष्ठ। विद्वान पंडित से करवाएँ।#प्रेत मुक्ति#मंत्र#गरुड़ पुराण
श्रीमद्भागवतक्या श्राद्ध से हर आत्मा मुक्त हो जाती है?कथा में धुंधुकारी के लिये गया श्राद्ध हुआ, फिर भी मुक्ति नहीं मिली; उसे भागवत सप्ताह से मुक्ति मिली।#श्राद्ध#गया श्राद्ध#प्रेत मुक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से प्रेत मुक्ति कैसे होती है?सूर्यदेव ने भागवत सप्ताह को मुक्ति का उपाय बताया; सात दिन कथा सुनकर धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ।#भागवत कथा#प्रेत मुक्ति#सप्ताह
श्रीमद्भागवतगया श्राद्ध से मुक्ति क्यों नहीं मिली?धुंधुकारी ने कहा कि सैकड़ों गया-श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं होगी, इसलिए दूसरा उपाय चाहिए।#गया श्राद्ध#प्रेत मुक्ति#धुंधुकारी
लोकधुन्धुकारी की कथा श्राद्ध में क्या बताती है?भागवत श्रवण से प्रेत मुक्ति होती है।#धुन्धुकारी#भागवत#प्रेत मुक्ति
लोकसपिण्डीकरण क्या है?प्रेत को पितृलोक में स्थापित करने वाला कर्म सपिण्डीकरण है।#सपिण्डीकरण#प्रेत मुक्ति#पितृलोक
श्राद्ध भेदसपिण्डीकरण श्राद्ध क्या है?सपिण्डीकरण श्राद्ध वह श्राद्ध है जो मृत्यु के बारहवें या तेरहवें दिन किया जाता है, जिसमें मृत व्यक्ति की आत्मा को पितरों के साथ मिलाया जाता है। सपिण्ड का अर्थ है समान पिण्ड वाले बनाना। इसमें चार पिण्ड बनते हैं - एक मृत का और तीन पिता, पितामह, प्रपितामह के। मृत के पिण्ड को तीनों में मिलाकर वह प्रेत-योनि से मुक्त होकर पितृ-योनि में प्रवेश करता है।#सपिण्डीकरण#मृत्यु पश्चात#पितर मिलन
लोकसपिण्डीकरण पहले एक साल बाद और अब 12वें दिन क्यों किया जाता है?कलियुग में जीवन की अस्थिरता के कारण गरुड़ पुराण के आधार पर सपिण्डीकरण 12वें दिन किया जाता है।#सपिण्डीकरण#12वां दिन#गरुड़ पुराण
लोकसपिण्डीकरण के बाद मृत आत्मा को पितृ पद कैसे मिलता है?सपिण्डीकरण में प्रेत-पिण्ड पितृ-पिण्डों से मिलकर मृत आत्मा को पितृ मंडल में प्रवेश दिलाता है।#सपिण्डीकरण#पितृ पद#प्रेत मुक्ति
लोकप्रेत योनि से मुक्ति का उपाय क्या बताया गया है?प्रेत मुक्ति के उपाय हैं: श्रद्धापूर्वक श्राद्ध, पिण्डदान, गया-श्राद्ध और श्रीमद्भागवत का श्रवण।#प्रेत मुक्ति#श्राद्ध#पिण्डदान
लोकसात गांठों वाले बांस का धुन्धुकारी कथा में क्या महत्व है?धुन्धुकारी का प्रेत सात गांठों वाले बांस में था; भागवत कथा से रोज एक गांठ फटी और सातवें दिन उसे मुक्ति मिली।#सात गांठों वाला बांस#धुन्धुकारी#भागवत कथा
लोकभागवत कथा से धुन्धुकारी को मुक्ति कैसे मिली?गोकर्ण के सात दिन के भागवत पारायण से बांस की सात गांठें फटीं और धुन्धुकारी प्रेत योनि से मुक्त होकर वैकुंठ गया।#भागवत कथा#धुन्धुकारी#प्रेत मुक्ति
लोकधुन्धुकारी को गया श्राद्ध से मुक्ति क्यों नहीं मिली?धुन्धुकारी के पाप अत्यंत भयंकर थे, इसलिए गया श्राद्ध से मुक्ति नहीं मिली; उसे भागवत श्रवण से मुक्ति मिली।#धुन्धुकारी#गया श्राद्ध#प्रेत मुक्ति
लोकगोकर्ण कौन थे?गोकर्ण गाय के गर्भ से जन्मे सात्विक दिव्य पुत्र थे, जिन्होंने भागवत पारायण से धुन्धुकारी को प्रेत योनि से मुक्त कराया।#गोकर्ण#धुन्धुकारी#भागवत महापुराण
लोकधुन्धुकारी कौन था?धुन्धुकारी आत्मदेव ब्राह्मण का पालित पुत्र था, जो बड़ा होकर महापापी, हिंसक, दुराचारी और चोर बना।#धुन्धुकारी#भागवत महापुराण#प्रेत कथा
जीवन एवं मृत्युबभ्रुवाहन की कथा में दान का क्या महत्व है?बभ्रुवाहन कथा में दान केंद्रीय है — राजा दानी थे, उन्होंने प्रेत के लिए घट दान-शय्यादान-वृषोत्सर्ग किए। 'शय्यादान और वृषोत्सर्ग से प्रेत परम गति पाता है।' यह कथा 'और्ध्वदैहिक दान की महिमा' के लिए ही सुनाई गई।#बभ्रुवाहन#दान#प्रेत मुक्ति
जीवन एवं मृत्युएकादशाह का क्या महत्व है?एकादशाह का महत्व — दशगात्र की पूर्णता, सर्वाधिक दान (गोदान-शय्यादान-वृषोत्सर्ग), परिवार की सूतक-मुक्ति और प्रेत की यमयात्रा-प्रारंभ। यह प्रेत-मुक्ति-प्रक्रिया का एक निर्णायक पड़ाव है।#एकादशाह#महत्व#प्रेत मुक्ति
जीवन एवं मृत्युप्रेत को मुक्ति देने के लिए कौन-कौन से कर्म आवश्यक हैं?प्रेत-मुक्ति के लिए आवश्यक कर्म — दाह-संस्कार, दशगात्र, एकादशाह श्राद्ध, षोडश श्राद्ध, सपिंडन, गोदान-शय्यादान-प्रेत घट दान, वृषोत्सर्ग और गया श्राद्ध। इन सबके संयोग से प्रेत 'परम गति' को प्राप्त होता है।#प्रेत मुक्ति#कर्म#संस्कार
जीवन एवं मृत्युबभ्रुवाहन को किसने मुक्त किया?राजा बभ्रुवाहन ने उस प्रेत को मुक्त किया — जो उनके परिजन भी नहीं था। प्रेत घट दान और श्राद्ध करने पर भगवान विष्णु की कृपा से वह मुक्त हुआ। यह 'दूसरे के श्राद्ध से प्रेत-मुक्ति' का प्रमाण है।#बभ्रुवाहन#प्रेत मुक्ति#दान