विस्तृत उत्तर
धुन्धुकारी का प्रसंग श्रीमद्भागवत महापुराण के माहात्म्य खण्ड में मिलता है। तुंगभद्रा नदी के तट पर आत्मदेव नामक विद्वान और धर्मनिष्ठ ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी धुन्धुली कुटिल, क्रूर और ईर्ष्यालु स्वभाव की थी। निःसंतान होने पर आत्मदेव को एक सन्यासी ने फल दिया, पर धुन्धुली ने वह फल अपनी गाय को खिला दिया और अपनी बहन के नवजात पुत्र को अपना बताकर पाल लिया, जिसका नाम धुन्धुकारी रखा गया। धुन्धुकारी बड़ा होकर महापापी, दुराचारी, हिंसक और चोर बना। उसने अपने माता-पिता को प्रताड़ित किया और पांच वेश्याओं के साथ रहकर उनके लिए चोरी करने लगा।
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