विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय की कथा के अनुसार, राजा बभ्रुवाहन ने स्वयं एक प्रेत को मुक्त किया।
यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश है — बभ्रुवाहन उस प्रेत के परिजन नहीं थे, फिर भी उन्होंने करुणावश उसके लिए श्राद्ध-दान किया और वह प्रेत मुक्त हो गया।
प्रेत ने स्वयं बभ्रुवाहन को 'प्रेत घट दान' की विधि बताई। गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि राजा ने पूछा — 'हे प्रेत! किस विधान से प्रेत घट का निर्माण करना चाहिए और किस विधान से उसका दान करना चाहिए?' — और प्रेत ने विधि बताई।
भगवान विष्णु की कृपा — अंततः सभी उचित संस्कारों और दानों के किए जाने पर भगवान विष्णु की कृपा से वह प्रेत मुक्त हुआ।
इस कथा की शिक्षा — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'जब दूसरे के द्वारा दिये हुए श्राद्ध से प्रेत की सद्गति हो गई तो फिर पुत्र के द्वारा प्रदत्त श्राद्ध से पिता की सद्गति हो जाए, इसमें क्या आश्चर्य!!' — यह इस कथा का केंद्रीय संदेश है।





