विस्तृत उत्तर
गोकर्ण आत्मदेव के घर जन्मे एक अत्यंत सात्विक और दिव्य मानव-पुत्र थे। जब आत्मदेव को संतान प्राप्ति के लिए सन्यासी ने फल दिया, तो उनकी पत्नी धुन्धुली ने वह फल स्वयं न खाकर गाय को खिला दिया। उस गाय के गर्भ से एक अत्यंत सात्विक और दिव्य मानव-पुत्र का जन्म हुआ, जिसके कान गाय जैसे थे, इसलिए उसका नाम गोकर्ण रखा गया। बाद में जब धुन्धुकारी अपने घोर पापों और हिंसक अकाल मृत्यु के कारण प्रेत बना, तब गोकर्ण ने उसकी मुक्ति के लिए प्रयत्न किया और सूर्यदेव के निर्देश पर सात दिनों तक श्रीमद्भागवत पुराण का पारायण किया।
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