विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में वक्ता की पूजा के बाद अपने कल्याण के लिये प्रसन्न मन से नियम ग्रहण करने को कहा गया है। यह नियम सात दिन तक यथाशक्ति धारण करना चाहिए। आगे श्रवण का उत्तम फल पाने के लिये लोक, धन, घर और पुत्र आदि की चिंता छोड़कर शुद्ध चित्त से कथा में मन रखने की बात कही गई है। संकल्प का भाव है कि कथा के सात दिन केवल भगवान की कथा के लिये समर्पित हों। साथ ही विघ्न न हो, इसके लिये पाँच ब्राह्मणों का वरण कर द्वादशाक्षर मंत्र से हरि-नाम जप कराया जाता है। इसलिए संकल्प में नियम, शुद्ध चित्त, चिंता-त्याग और कथा-केन्द्रित जीवन का भाव है।
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