विस्तृत उत्तर
धुंधुकारी के मुक्त होने के बाद भागवत कथा की महिमा में कहा गया है कि इस लोक में सप्ताह श्रवण से भगवान शीघ्र प्राप्त होते हैं और दोषों की निवृत्ति के लिये यही साधन है। कथा से वंचित लोग जल के बुलबुले और जीवों में मच्छरों की तरह केवल मरने के लिये जन्म लेते हैं। फिर बाँस की गाँठ का उदाहरण दिया गया: जिसके प्रभाव से जड़ और सूखे बाँस की गाँठें फट सकती हैं, उस कथा के श्रवण से चित्त की गाँठ खुल जाना कौन बड़ी बात है। सप्ताह श्रवण से हृदय की ग्रंथि खुलती है, सारे संशय कट जाते हैं और कर्म क्षीण होते हैं। यही हृदय की गांठ खुलने का रूप है।
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