विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में एक समय भोजन किया जा सकता है। श्रोता के लिये कहा गया है कि मल-मूत्र के वेग को नियंत्रित रखने के लिये हल्का आहार सुखकारी है, इसलिए एक समय हविष्य अन्न खाना चाहिए। आगे आहार के विकल्पों में फलाहार और एक समय भोजन का भी उल्लेख है। जो नियम सुख से निभ सके और कथा श्रवण में सहायक हो, उसे ग्रहण करना चाहिए। यदि उपवास से श्रवण में बाधा पड़ती हो, तो भोजन करना बेहतर बताया गया है। नियम से कथा सुनने वाले के लिये ब्रह्मचर्य, भूमि पर शयन और कथा समाप्ति के बाद पत्तल में भोजन का विधान भी बताया गया है। इसलिए एक समय भोजन स्वीकार्य और व्यावहारिक विकल्प है।
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