विस्तृत उत्तर
यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था श्रवण और श्रवणी देवों के माध्यम से कार्य करती है। चित्रगुप्त की अकाट्य सूचना प्रणाली के पीछे यही शक्तिशाली और अदृश्य व्यवस्था है। श्रवण देव पुरुषों के गुप्त से गुप्त कर्मों पर दृष्टि रखते हैं, जबकि श्रवणी देवियाँ स्त्रियों के शुभ-अशुभ कर्मों का सूक्ष्म अवलोकन करती हैं। मनुष्य बंद कमरों, अंधकार या एकांत में जो भी कर्म करता है, उसे वे उसी क्षण देख और सुन लेते हैं। वे शुभ-अशुभ वचन और कर्मों को ब्रह्मा के कानों तक और भगवान चित्रगुप्त की पंजिका तक पहुंचाते हैं। यमराज के दरबार में वे प्रत्यक्ष गवाह बनकर जीवात्मा के प्रत्येक कृत्य का प्रमाण भी देते हैं।
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