विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में कथा की विधि दो स्तरों पर आती है। पहले नारदजी पूछते हैं कि कथा कहाँ, कितने दिनों में और किस विधि से होनी चाहिए। सनकादि उन्हें हरिद्वार के पास आनंद नामक गंगातट पर कथा करने को कहते हैं और बताते हैं कि वहाँ कथा में विशेष रस उत्पन्न होगा। फिर वे कहते हैं कि भागवत का श्रवण सदा अच्छा है और दिन का कोई कठोर नियम नहीं है। सत्यभाषण और ब्रह्मचर्य के साथ निरंतर श्रवण श्रेष्ठ माना गया है। लेकिन कलियुग में लंबे नियम निभाना कठिन होने से श्रीशुकदेवजी की बताई सात दिन की सप्ताह विधि अपनाई जाती है।
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