विस्तृत उत्तर
सत्यलोक पहुँचने वाले जीवों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में विभक्त किया गया है। प्रथम वे महान निष्काम कर्मयोगी और ऊर्ध्वरेता ब्रह्मचारी जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन वेदों के नियमों के अनुसार पूर्ण पवित्रता और इन्द्रिय-निग्रह के साथ बिताया है। द्वितीय वे उपासक जो हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा के सार्वभौमिक स्वरूप) या सगुण ब्रह्म की निष्काम उपासना करते हैं। तृतीय भगवान के शुद्ध भक्त जिनका लक्ष्य सीधे वैकुण्ठ पहुँचना होता है किन्तु वे सत्यलोक से होकर गुजरते हैं। एक रहस्यमयी तथ्य यह भी है कि भगवान के हाथों मृत्यु पाने वाला जीव भी सत्यलोक को प्राप्त कर सकता है क्योंकि भगवान के हाथों मृत्यु पाना परम कल्याण है।
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