विस्तृत उत्तर
देवी साधना में ब्रह्मचर्य आवश्यक:
- 1ऊर्जा संरक्षण: वीर्य = ओजस = आध्यात्मिक ऊर्जा। ब्रह्मचर्य = ऊर्जा ऊर्ध्वगमन → कुंडलिनी जागरण → देवी शक्ति ग्रहण।
- 2मन शुद्धि: काम वासना = मन अशुद्ध। अशुद्ध मन = मंत्र शक्ति कम। शुद्ध मन = मंत्र तीव्र।
- 3देवी = कुमारी/शक्ति: देवी = पवित्रता/शक्ति। अपवित्र साधक = देवी अप्रसन्न (विशेषतः उग्र देवी)।
- 4तंत्र शास्त्र: बिना ब्रह्मचर्य = तांत्रिक साधना विफल या विपरीत फल।
अवधि: अनुष्ठान काल (9/21/40 दिन) = अनिवार्य। दैनिक पूजा = अनुशंसित किन्तु गृहस्थ में लचीलापन।



