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देवी साधना📜 तंत्र शास्त्र, योग शास्त्र1 मिनट पठन

देवी साधना में ब्रह्मचर्य का पालन क्यों आवश्यक है?

संक्षिप्त उत्तर

ऊर्जा संरक्षण (ओजस→कुंडलिनी)। मन शुद्धि = मंत्र तीव्र। देवी = पवित्रता — अपवित्र साधक अप्रसन्न। तंत्र: बिना ब्रह्मचर्य = विफल/विपरीत। अनुष्ठान काल अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

देवी साधना में ब्रह्मचर्य आवश्यक:

  1. 1ऊर्जा संरक्षण: वीर्य = ओजस = आध्यात्मिक ऊर्जा। ब्रह्मचर्य = ऊर्जा ऊर्ध्वगमन → कुंडलिनी जागरण → देवी शक्ति ग्रहण।
  2. 2मन शुद्धि: काम वासना = मन अशुद्ध। अशुद्ध मन = मंत्र शक्ति कम। शुद्ध मन = मंत्र तीव्र।
  3. 3देवी = कुमारी/शक्ति: देवी = पवित्रता/शक्ति। अपवित्र साधक = देवी अप्रसन्न (विशेषतः उग्र देवी)।
  4. 4तंत्र शास्त्र: बिना ब्रह्मचर्य = तांत्रिक साधना विफल या विपरीत फल।

अवधि: अनुष्ठान काल (9/21/40 दिन) = अनिवार्य। दैनिक पूजा = अनुशंसित किन्तु गृहस्थ में लचीलापन।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, योग शास्त्र
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