विस्तृत उत्तर
चामुण्डा देवी दुर्गा का अत्यंत उग्र स्वरूप हैं। दुर्गा सप्तशती के सातवें अध्याय में वर्णित है कि देवी ने चण्ड और मुण्ड नामक असुरों का वध किया — इसलिए 'चामुण्डा' नाम पड़ा।
सामान्य भक्तों के लिए साधना
- 1नवार्ण मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' — यह दुर्गा सप्तशती का मूल मंत्र है और चामुण्डा का प्रमुख मंत्र। इसे सामान्य भक्त भी जप सकते हैं।
- 2दुर्गा सप्तशती पाठ — विशेषकर 7वां अध्याय।
- 3नवरात्रि में विशेष पूजा।
- 4अष्टमी और चतुर्दशी पर पूजा विशेष फलदायी।
- 5लाल पुष्प, नारियल, सिंदूर अर्पित करें।
सावधानियां
- 1तांत्रिक चामुण्डा साधना गुरु दीक्षा से ही करें।
- 2चामुण्डा उग्र देवी हैं — बिना विधि के पूजा दोषकारक हो सकती है।
- 3साधना काल में कठोर ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार।
- 4मानसिक अस्थिरता या भय हो तो उग्र साधना न करें।
- 5नवार्ण मंत्र का उच्चारण शुद्ध होना अत्यावश्यक — प्रत्येक बीज (ऐं, ह्रीं, क्लीं) का शुद्ध उच्चारण।
- 6साधना गोपनीय रखें।
प्रमुख मंदिर: चामुण्डा देवी मंदिर, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)।


