विस्तृत उत्तर
भागवत कथा में वक्ता चुनते समय सावधानी भी बताई गई है। पाठ कहता है कि ऐसे लोगों को भागवत वचन में नियुक्त नहीं करना चाहिए जो पंडित होते हुए भी अनेक धर्मों के चक्कर में पड़े हों, स्त्री-लोलुप हों या पाखंड का प्रचार करने वाले हों। इसका अर्थ है कि केवल विद्वता पर्याप्त नहीं है। वक्ता के आचरण, निष्कामता और वैष्णव भावना को भी देखा जाता है। कथा का लक्ष्य श्रोताओं को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और मुक्ति की ओर ले जाना है। यदि वक्ता स्वयं भ्रम, वासना या पाखंड में उलझा हो, तो वह कथा का शुद्ध भाव नहीं दे पाएगा। इसलिए योग्य वक्ता चयन सप्ताह विधि का महत्त्वपूर्ण भाग है।
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