चामुण्डा देवी की साधना कैसे करें और क्या सावधानियां रखें?
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चामुण्डा = चण्ड+मुण्ड वध से नाम (सप्तशती अध्याय 7)। मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' (नवार्ण — सभी जप सकते हैं)। अष्टमी/चतुर्दशी विशेष। सावधानी: तांत्रिक साधना = गुरु दीक्षा। उच्चारण शुद्धि आवश्यक। ब्रह्मचर्य, गोपनीयता। कांगड़ा मंदिर प्रसिद्ध।
- 1नवार्ण मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' — यह दुर्गा सप्तशती का मूल मंत्र है और चामुण्डा का प्रमुख मंत्र। इसे सामान्य भक्त भी जप सकते हैं।
- 2दुर्गा सप्तशती पाठ — विशेषकर 7वां अध्याय।
- 3नवरात्रि में विशेष पूजा।
- 4अष्टमी और चतुर्दशी पर पूजा विशेष फलदायी।
- 5लाल पुष्प, नारियल, सिंदूर अर्पित करें।
- 6तांत्रिक चामुण्डा साधना गुरु दीक्षा से ही करें।
- 7चामुण्डा उग्र देवी हैं — बिना विधि के पूजा दोषकारक हो सकती है।
- 8साधना काल में कठोर ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार।
- 9मानसिक अस्थिरता या भय हो तो उग्र साधना न करें।
- 10नवार्ण मंत्र का उच्चारण शुद्ध होना अत्यावश्यक — प्रत्येक बीज (ऐं, ह्रीं, क्लीं) का शुद्ध उच्चारण।
- 11साधना गोपनीय रखें।
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देवी साधना
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