विस्तृत उत्तर
दुर्गा जी के कई बीज मंत्र हैं — प्रत्येक का अपना विशेष महत्व और शक्ति है:
1दुर्गा का मूल बीज मंत्र
> दुं (Dum)
यह दुर्गा जी का एकाक्षरी बीज मंत्र है — 'द' = दुर्गा का प्रतीक, 'उं' = रक्षा का स्वर।
2नवार्ण मंत्र (नौ अक्षरों का)
> ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे
यह सप्तशती का सर्वोच्च मंत्र है:
- ▸ऐं = महासरस्वती बीज (ज्ञान, वाणी)
- ▸ह्रीं = महालक्ष्मी बीज (शक्ति, माया)
- ▸क्लीं = महाकाली बीज (इच्छाशक्ति)
- ▸चामुंडायै विच्चे = चामुंडा (काली-चंडी) का आह्वान
3दुर्गा गायत्री बीज
> ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि।
> तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥
4महालक्ष्मी बीज
> श्रीं — धन, समृद्धि और लक्ष्मी के लिए
5चंडी बीज मंत्र
> ह्रीं — देवी की माया शक्ति
मंत्र का उपयोग
- ▸नित्य जप: 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' — 108 बार
- ▸सप्तशती पाठ में: नवार्ण मंत्र अनिवार्य
- ▸विशेष साधना: केवल 'दुं' का 1008 बार जप
नवार्ण मंत्र का महत्व
दुर्गा सप्तशती में नवार्ण मंत्र को 'सर्वमंत्रमयी' कहा गया है — यह त्रिदेवी (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) को एकसाथ जागृत करता है।
