न=पृथ्वी, मः=जल, शि=अग्नि, वा=वायु, य=आकाश — पांच अक्षर पंचमहाभूतों और शिव के पंचकृत्यों (सृष्टि-स्थिति-संहार-तिरोभाव-अनुग्रह) का प्रतीक। शिव पुराण में महामंत्र। शंकराचार्य का पंचाक्षर स्तोत्र इसी पर आधारित।
ऋग्वेद 3.62.10: 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।' अर्थ: उस श्रेष्ठ परमात्मा (सविता) के दिव्य तेज का हम ध्यान करें, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे। ऋषि विश्वामित्र।
सर्वाधिक शक्तिशाली: ॐ (आदि मंत्र), गायत्री (ऋग्वेद 3.62.10 — सभी मंत्रों की माँ), महामृत्युंजय (ऋग्वेद 7.59.12 — रोग-मृत्यु रक्षा), पंचाक्षरी (शिव — मोक्षदायक), नवार्ण (देवी उपासना)। मंत्र शक्ति = ध्वनि + श्रद्धा + नियमितता।
सर्वश्रेष्ठ मंत्र: गायत्री (ॐ भूर्भुवः स्वः...) — ऋग्वेद 3.62.10 — वैदिक मंत्रों में सर्वोच्च। ॐ — मंडूक्य उपनिषद: 'ॐ ही सब कुछ है।' इष्ट देव का मंत्र: शिव — पंचाक्षरी; विष्णु — द्वादशाक्षरी; दुर्गा — नवार्ण। गीता: जपयज्ञ सर्वश्रेष्ठ यज्ञ।
काली का मूल बीज मंत्र है 'क्रीं'। सामान्य साधना के लिए 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' (षडाक्षर) सर्वोत्तम और सुरक्षित है। काली गायत्री 'ॐ महाकाल्यै च विद्महे...' ज्ञान और शक्ति के लिए। द्वादशाक्षर उच्च तांत्रिक मंत्र — गुरु दीक्षा के बाद।
काली का मूल बीज मंत्र है 'क्रीं'। सामान्य साधना के लिए 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' (षडाक्षर) सर्वोत्तम और सुरक्षित है। काली गायत्री 'ॐ महाकाल्यै च विद्महे...' ज्ञान और शक्ति के लिए। द्वादशाक्षर उच्च तांत्रिक मंत्र — गुरु दीक्षा के बाद।
दुर्गा का मूल बीज है 'दुं'। सर्वप्रमुख नवार्ण मंत्र है 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' — 9 अक्षर, तीन शक्तियों (महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती) का संयुक्त मंत्र। सप्तशती पाठ से पहले 108 नवार्ण जप अनिवार्य है।
महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद 7.59.12 का है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...'। अर्थ: तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें जैसे खीरा पककर बेल से स्वतः अलग होता है। यह भारतीय परंपरा का सर्वश्रेष्ठ रोग-मृत्यु रक्षा मंत्र है।
शिव के प्रमुख मंत्र: महामृत्युंजय (ऋग्वेद 7.59.12) — रोग-मृत्यु रक्षा; ॐ नमः शिवाय — नित्य सर्वकामना; शिव गायत्री — ज्ञान-बुद्धि। शिव पुराण में 'ॐ नमः शिवाय' को ही सर्वोत्तम बताया गया है — यह पंचाक्षरी सभी मनोकामना पूर्ण करती है।
शिव पंचाक्षरी मंत्र है 'नमः शिवाय' (संपूर्ण: 'ॐ नमः शिवाय')। पाँच अक्षर पाँच तत्वों के प्रतीक हैं — न (पृथ्वी), म (जल), शि (अग्नि), वा (वायु), य (आकाश)। श्री रुद्रम् (कृष्ण यजुर्वेद) से उत्पन्न यह सर्वाधिक शक्तिशाली शिव मंत्र है।
बीज मंत्र एकाक्षरी या अल्पाक्षरी ध्वनि-शक्ति हैं जिनमें देवता की मूल ऊर्जा समाहित है। प्रमुख बीज: ॐ (ब्रह्म), श्रीं (लक्ष्मी), ऐं (सरस्वती), क्रीं (काली), ह्रीं (माया), गं (गणेश), हं (हनुमान)। बीज मंत्र बड़े मंत्रों का सार है — इनका जप अत्यंत शक्तिशाली है।
गुरु मंत्र वह मंत्र है जो सिद्ध गुरु दीक्षा के समय शिष्य को देते हैं। इसमें गुरु की साधना की शक्ति होती है — यह शीघ्र सिद्ध होता है। दीक्षित मंत्र को गोपनीय रखें। बिना गुरु के गायत्री मंत्र, ॐ और राम नाम का जप करें।
ॐ सर्वोच्च और आदि मंत्र है। गायत्री मंत्र 'सर्वमंत्रेषु श्रेष्ठ' है। महामृत्युंजय रोग-मृत्यु से रक्षा के लिए, ॐ नमः शिवाय मोक्ष के लिए, और राम नाम कलियुग का सर्वसुलभ महामंत्र है। आपके इष्टदेव का मंत्र आपके लिए सर्वश्रेष्ठ है।
हनुमान जी का मूल बीज मंत्र 'हं' है। 'हं' में वायु शक्ति, प्राण और बल समाहित है। 'हं हनुमते' दो बीजों का संयोग अत्यंत शक्तिशाली है। रुद्राक्ष माला से 108 बार 'हं' जप करें।
हनुमान जी का मूल मंत्र 'ॐ हं हनुमते नमः' है। बुद्धि-बल के लिए हनुमान गायत्री 'ॐ आंजनेयाय विद्महे...' जपें। संकट में 'ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा' और भूत-प्रेत भय में पंचमुखी हनुमान मंत्र जपें।
संकट नाशन के लिए 'ॐ गं गणपतये नमः' और 'वक्रतुंड महाकाय...' सर्वाधिक प्रभावी हैं। संकटनाशन स्तोत्र के 12 नाम (वक्रतुंड, एकदंत, कृष्णपिंगाक्ष...) तीन बार बोलने से कोई विघ्न नहीं रहता। महासंकट में हेरंब मंत्र 1008 बार जपें।
गणेश का मूल बीज मंत्र 'गं' है। सर्वाधिक प्रचलित षडाक्षरी मंत्र है 'ॐ गं गणपतये नमः'। विघ्न नाशन के लिए 'ॐ वक्रतुंड महाकाय...' और बुद्धि के लिए गणेश गायत्री 'ॐ एकदंताय विद्महे...' जपें।
महालक्ष्मी का मूल बीज मंत्र 'श्रीं' है। त्रिबीज मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं' सर्वाधिक शक्तिशाली है। इन्हें स्फटिक या कमलगट्टे की माला से शुक्रवार को पीले वस्त्र में जपें।
धन प्राप्ति के लिए 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' सरल और प्रभावशाली मंत्र है। व्यापार वृद्धि के लिए कुबेर-लक्ष्मी मंत्र जपें। श्री सूक्त के 16 ऋचाओं का पाठ सर्वोत्तम है। 'श्रीं' बीज मंत्र का 1008 बार जप धन आकर्षण के लिए प्रभावी है।
महाकाली का मूल बीज मंत्र 'क्रीं' है। सरल साधना के लिए 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' और विशेष तांत्रिक साधना के लिए दशाक्षरी मंत्र 'ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके... स्वाहा' है। दशाक्षरी मंत्र गुरु दीक्षा के बाद ही जपें।
दुर्गा का मूल बीज मंत्र 'दुं' है। सप्तशती का सर्वोच्च मंत्र नवार्ण मंत्र है — 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे'। इसमें ऐं (महासरस्वती), ह्रीं (महालक्ष्मी) और क्लीं (महाकाली) के बीज हैं।
महामृत्युंजय मंत्र है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥' यह ऋग्वेद (7.59.12) का मंत्र है। अर्थ — तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें।
शिव प्रसन्नता के लिए महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...) और पंचाक्षरी (ॐ नमः शिवाय) सर्वाधिक शक्तिशाली हैं। रोग-मृत्यु भय में महामृत्युंजय और मोक्ष के लिए पंचाक्षरी श्रेष्ठ है।
शिव पंचाक्षरी मंत्र है — 'ॐ नमः शिवाय'। 'नमः शिवाय' के पाँच अक्षर (न, मः, शि, वा, य) पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के प्रतीक हैं। यजुर्वेद के श्री रुद्रम् में यह मंत्र मिलता है।