विस्तृत उत्तर
शिव पंचाक्षरी मंत्र का वर्णन श्री रुद्रम् (कृष्ण यजुर्वेद) और शिव पुराण में मिलता है:
पंचाक्षरी मंत्र
> नमः शिवाय (Na-maḥ Śi-vā-ya)
संपूर्ण रूप:
> ॐ नमः शिवाय
'पंचाक्षरी' क्यों
नमः शिवाय' में पाँच अक्षर हैं — न, म, शि, वा, य। इसीलिए यह 'पंचाक्षरी' कहलाता है। 'ॐ' इसका बीज है जो पहले लगाया जाता है।
पाँच अक्षरों का पाँच तत्वों से संबंध
शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता में वर्णित:
- ▸न — पृथ्वी तत्व (गंध)
- ▸म — जल तत्व (रस)
- ▸शि — अग्नि तत्व (रूप)
- ▸वा — वायु तत्व (स्पर्श)
- ▸य — आकाश तत्व (शब्द)
इस प्रकार पंचाक्षरी मंत्र पाँचों तत्वों का, पाँचों ज्ञानेंद्रियों का और पाँचों कर्मेंद्रियों का प्रतीक है।
मंत्र का अर्थ
- ▸नमः = नमस्कार, समर्पण
- ▸शिवाय = शिव को, जो कल्याणकारी हैं
सरल अर्थ: 'कल्याणकारी शिव को मेरा नमस्कार।'
गहरा अर्थ: 'मैं अपने अहंकार को शिव के चरणों में समर्पित करता हूँ।'
पंचाक्षरी की उत्पत्ति
श्री रुद्रम् के आठवें अनुवाक में 'नमः शिवाय च शिवतराय च' का उल्लेख है। यही आगे चलकर पंचाक्षरी मंत्र के रूप में स्थापित हुआ।
पंचाक्षरी के जप की विधि
- ▸रुद्राक्ष माला से जप
- ▸प्रातःकाल या प्रदोष काल
- ▸108, 324 या 1008 बार
- ▸शिव ध्यान करते हुए — हिमालय जैसे श्वेत, चंद्रशेखर, त्रिनेत्र
शिव पुराण का वचन
पंचाक्षरी महामंत्रः सर्वपापप्रणाशनः' — पंचाक्षरी महामंत्र सभी पापों का नाश करता है।





