ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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मंत्र ज्ञान📜 शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), यजुर्वेद (शिव पंचाक्षर स्तोत्र — शंकराचार्य)2 मिनट पठन

ॐ नमः शिवाय के पांच अक्षरों का रहस्य क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

न=पृथ्वी, मः=जल, शि=अग्नि, वा=वायु, य=आकाश — पांच अक्षर पंचमहाभूतों और शिव के पंचकृत्यों (सृष्टि-स्थिति-संहार-तिरोभाव-अनुग्रह) का प्रतीक। शिव पुराण में महामंत्र। शंकराचार्य का पंचाक्षर स्तोत्र इसी पर आधारित।

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विस्तृत उत्तर

ॐ नमः शिवाय' (पंचाक्षर मंत्र) शैव परंपरा का सर्वोच्च मंत्र है। शिव पुराण में इसे 'महामंत्र' कहा गया है।

पांच अक्षर: न-मः-शि-वा-य

प्रत्येक अक्षर का रहस्य

  1. 1'न' (Na)पृथ्वी तत्व — नाभि चक्र (मणिपुर) से जुड़ा। ब्रह्मा की शक्ति। शरीर और भौतिक जगत।
  1. 1'मः' (Ma)जल तत्व — स्वाधिष्ठान चक्र से जुड़ा। विष्णु की शक्ति। जीवन और पालन।
  1. 1'शि' (Shi)अग्नि तत्व — अनाहत (हृदय) चक्र से जुड़ा। रुद्र (शिव) की शक्ति। संहार और परिवर्तन।
  1. 1'वा' (Va)वायु तत्व — विशुद्धि (कंठ) चक्र से जुड़ा। महेश्वर की शक्ति। गति और प्राण।
  1. 1'य' (Ya)आकाश तत्व — आज्ञा (तीसरा नेत्र) चक्र से जुड़ा। सदाशिव की शक्ति। चेतना और अनंतता।

पंचतत्व संबंध

यह पांच अक्षर पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतिनिधित्व करते हैं — अर्थात् यह मंत्र सम्पूर्ण सृष्टि को समाहित करता है।

पंचकृत्य संबंध

शिव के पांच कृत्य: सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोभाव (माया), अनुग्रह (मोक्ष) — पांच अक्षर इन पांच कृत्यों से भी जुड़े हैं।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र (शंकराचार्य): *'नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय...'* — प्रत्येक छंद एक अक्षर (न, म, शि, वा, य) से प्रारंभ होता है।

जप विधि: 108 बार जप, रुद्राक्ष माला पर, ध्यान अवस्था में। यह मंत्र शैव परंपरा में मोक्षदायक माना जाता है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), यजुर्वेद (शिव पंचाक्षर स्तोत्र — शंकराचार्य)
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