विस्तृत उत्तर
शिव के प्रमुख मंत्रों का वर्णन श्री रुद्रम् (कृष्ण यजुर्वेद), ऋग्वेद और शिव पुराण में मिलता है:
1महामृत्युंजय मंत्र — सर्वोच्च
> ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
> उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
(ऋग्वेद 7.59.12 / यजुर्वेद)
यह शिव का सर्वोच्च मंत्र है — रोग, मृत्यु और भय से रक्षा के लिए।
2पंचाक्षरी — सर्वोत्तम नित्य मंत्र
> ॐ नमः शिवाय
सर्वसुलभ, सर्वकामना पूरक। श्री रुद्रम् से उत्पन्न।
3शिव गायत्री
> ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नः शिवः प्रचोदयात्॥
ज्ञान, बुद्धि और शिव कृपा के लिए।
4रुद्राष्टक (तुलसीदास)
रामचरितमानस में तुलसीदास रचित:
> 'नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्...'
5शिव पंचाक्षरी स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)
> 'नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय...'
उद्देश्यानुसार मंत्र
| उद्देश्य | मंत्र |
|---------|-------|
| रोग-मृत्यु रक्षा | महामृत्युंजय |
| नित्य पूजा-भक्ति | ॐ नमः शिवाय |
| ज्ञान-बुद्धि | शिव गायत्री |
| संकट नाश | 'ॐ नमो भगवते रुद्राय' |
| मोक्ष | पंचाक्षरी |
सार
शिव पुराण में कहा गया है — शिव को प्रसन्न करने के लिए 'ॐ नमः शिवाय' ही पर्याप्त है। यह सरल पंचाक्षरी सभी इच्छाओं की पूर्ति करती है।





