विस्तृत उत्तर
हनुमान जी के बीज मंत्र का वर्णन हनुमत्-तंत्र और हनुमान पुराण में मिलता है:
1हनुमान का मूल बीज मंत्र
> हं (Ham/Hang)
यह हनुमान जी का एकाक्षरी बीज है:
- ▸'ह' = हनुमान — वायु, प्राण और बल की शक्ति
- ▸'अनुस्वार (ं)' = अनंत शक्ति का प्रसार
2हनुमान के मुख्य बीज समूह
> हं हनुमते
दो बीजों का यह संयोग अत्यंत शक्तिशाली है।
3पंचमुखी हनुमान के पाँच बीज
हनुमान जी के पाँच मुखों के पाँच बीज हैं:
- ▸हनुमान मुख: हं
- ▸नरसिंह मुख: क्ष्रौं
- ▸गरुड़ मुख: गं (कुछ मतों में)
- ▸वराह मुख: ह्रीं
- ▸हयग्रीव मुख: ह्स्खफ्रें
4वायुपुत्र बीज
> रां (Ram)
रां बीज हनुमान जी को राम से जोड़ता है — यह उनकी रामभक्ति का बीज है।
5हनुमान शक्ति बीज (तंत्र शास्त्र)
> ऐं ह्रीं हनुमते
- ▸ऐं = वाणी और बुद्धि
- ▸ह्रीं = शक्ति और माया
- ▸हनुमते = हनुमान शक्ति
बीज मंत्र जप विधि
- 1मंगलवार या शनिवार से प्रारंभ करें
- 2लाल आसन पर दक्षिण या पूर्व मुख
- 3रुद्राक्ष माला से जप
- 4'हं' का उच्चारण करते समय नाभि से ऊर्जा उठती महसूस करें
- 5प्रत्येक 'हं' के साथ हनुमान जी का रूप ध्यान में रखें
बीज मंत्र जप संख्या
- ▸नित्य: 108 बार
- ▸विशेष: 1008 बार (मंगलवार)
- ▸अनुष्ठान: 1,25,000 (सवा लाख)
'हं' बीज का तात्विक अर्थ
हनुमान जी 'वायुपुत्र' हैं — वायु तत्व के अधिपति। 'हं' में वायु की गति, प्राण की शक्ति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा समाहित है। यह बीज भय दूर करता है, बल देता है और प्राण शक्ति बढ़ाता है।





