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काल भैरव मंत्र: 41 दिन में सिद्ध, रिद्धि-सिद्धि व प्रेत रक्षा !
भैरव

काल भैरव मंत्र: 41 दिन में सिद्ध

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अंतिम अपडेट: 20 मई 2025
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काले जादू, डाकिनी-भूत बाधा से मुक्ति के लिए करें यह सिद्ध काला भैरव शाबर मंत्र – पाएं अनोखी मोहनी शक्ति और तंत्र रक्षा

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काला भैरव कपिला केश शाबर मंत्र

३३. काला भैरव कपिला केश शाबर मंत्र

$ॐ गुरुजी काला भैरुँ कपिला के श , काना मदरा, भगवाँ भेस। मार-मार  काली-पुत्र। बारह कोस की मार,  भूताँ हात कलेजी खूँहा गेडिया। जहाँ जाऊँ  भैरुँ साथ। बारह कोस की रिद्धि ल्यावो।  चौबीस कोस की सिद्धि ल्यावो। सूती होय , तो जगाय ल्यावो। बैठा होय, तो  उठाय ल्यावो। अनन्त के सर की  भारी ल्यावो। गौरा-पार्वती की विछिया ल्यावो।  गेल्याँ की रस्तान मोह, कु वे की पणिहारी  मोह, बैठा बाणिया मोह, घर बैठी बणियानी  मोह, राजा की रजवाड़ मोह, महिला बैठी  रानी मोह। डाकिनी को, शाकिनी को, भूतनी को,  पलीतनी को, ओपरी को, पराई को, लाग  कूँ , लपट कूँ , धूम कूँ , धक्का  कूँ , पलीया कूँ , चौड़ कूँ ,  चौगट कूँ , काचा कूँ , कलवा कूँ ,  भूत कूँ , पलीत कूँ , जिन कूँ ,  राक्षस कूँ , बरियों से बरी कर दे। नजराँ  जड़ दे ताला, इत्ता भैरव नहीं करे , तो  पिता महादेव की जटा तोड़ तागड़ी करे , माता  पार्वती का चीर फाड़ लँगोट करे । चल  डाकिनी, शाकिनी, चौडूँ मैला बाकरा, देस्यूँ मद की  धार, भरी सभा में द्यूँ आने में कहाँ लगाई  बार ? खप्पर में खाय, मसान में लौटे, ऐसे  काला भैरुँ की कू ण पूजा मेटे। राजा मेटे  राज से जाय, प्रजा मेटे दू ध-पूत से जाय,  जोगी मेटे ध्यान से जाय। शब्द साँचा, ब्रह्म वाचा,  चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा।$ 4

देवता:

काल भैरव (काली-पुत्र)।

स्रोत:

शाबर तंत्र परंपरा।

प्रयोजन:

इस मंत्र में वर्णित सभी कार्यों की सिद्धि, जैसे आकर्षण (मोह), रिद्धि-सिद्धि प्राप्ति, नकारात्मक शक्तियों (डाकिनी, शाकिनी, भूत, प्रेत, राक्षस) से रक्षा एवं उनका निवारण।

विधि:

यह अनुष्ठान रविवार से प्रारंभ करें। एक तिकोना पत्थर का टुकड़ा अपने सामने रखें, उस पर तेल और सिंदूर लगाएं। पान और नारियल अर्पित करें। प्रतिदिन सरसों के तेल का अखंड दीपक जलाएं। ४१ दिनों तक प्रतिदिन २१ बार इस मंत्र का जप करें। जप के पश्चात् छार, छारिला, कपूर, केसर और लौंग की धूप दें। भोग के लिए बाकला, बाटी बाकला (अथवा उड़द के पकोड़े, बेसन के लड्डू, और गुड़ मिला दूध) रखें।

महत्व:

यह काल भैरव का एक अत्यंत शक्तिशाली और विस्तृत शाबर मंत्र है, जिसमें विभिन्न प्रकार के प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता है। इसकी भाषा और क्रियाएं विशिष्ट शाबर परंपरा को दर्शाती हैं।

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काल भैरव मंत्र: 41 दिन में सिद्ध पर आगे क्या समझना जरूरी है

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भैरव श्रेणी के लेख आम तौर पर महत्व, विधि, समय, शास्त्रीय आधार और सावधानियों को अलग-अलग हिस्सों में खोलते हैं. Bhole संग्रह के दूसरे लेख यही पृष्ठभूमि और गहरी करते हैं।

भैरव, मोह, रिद्धि जैसे जुड़े विषय आगे पढ़ने से यह समझ आता है कि विषय का व्यवहारिक उपयोग क्या है, किन परिस्थितियों में नियम बदलते हैं और किस जानकारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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इसी विषय के 5 प्रश्न आपके व्यावहारिक संदेह साफ कर सकते हैं।

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❓ इस विषय के 5 प्रश्न

भैरव साधना

भैरव साधना कैसे करें?

भैरव साधना: काले/नीले वस्त्र, सरसों तेल दीप, उड़द की दाल, लाल पुष्प। मंत्र: 'ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ॐ' — 108 बार। काल भैरव अष्टकम् (शंकराचार्य) पाठ करें। भैरव शत्रु भय नाश, स्थान रक्षा और सिद्धि के देवता हैं।

भैरव साधना

भैरव साधना कैसे करें?

भैरव साधना: शनिवार रात्रि/अमावस्या। काले तिल, उड़द, सरसों तेल दीपक (5 बाती)। काल भैरव अष्टकम् पाठ। मंत्र: 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं।' 108 जप। नैवेद्य: उड़द + काले तिल। फल: बाधा-शत्रु से रक्षा।

भैरव साधना

भैरव मंत्र क्या है?

भैरव के प्रमुख मंत्र: बटुक भैरव — 'ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ॐ' (संकट नाश); 'ॐ ह्रीं बटुकाय नमः' (नित्य जप); काल भैरव — 'ॐ काल भैरवाय नमः'; भैरव गायत्री — 'ॐ भैरवाय विद्महे महाकालाय धीमहि।' नित्य 108 बार जप।

भैरव साधना समय

भैरव साधना कब करनी चाहिए?

भैरव साधना: भैरव अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी — सर्वश्रेष्ठ)। प्रत्येक शनिवार। अमावस्या रात्रि। चतुर्दशी। निशीथ काल (रात 12 बाद)। उत्तर/पूर्व मुख। संध्या काल वर्जित।

व्यापार और गृहस्थ जीवन

बटुक भैरव यंत्र से व्यापार में क्या लाभ होता है?

बटुक भैरव यंत्र को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करके पूजा करने से साधना प्रभाव बढ़ता है, सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है और व्यापार बाधा दूर होती है।

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