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भैरव साधना समय📜 भैरव तंत्र, शिव पुराण — भैरव महिमा1 मिनट पठन

भैरव साधना कब करनी चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

भैरव साधना: भैरव अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी — सर्वश्रेष्ठ)। प्रत्येक शनिवार। अमावस्या रात्रि। चतुर्दशी। निशीथ काल (रात 12 बाद)। उत्तर/पूर्व मुख। संध्या काल वर्जित।

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विस्तृत उत्तर

भैरव साधना के शुभ समय का वर्णन भैरव तंत्र और शिव पुराण में है:

सर्वश्रेष्ठ समय

1भैरव अष्टमी

मार्गशीर्ष (अगहन) माह कृष्ण पक्ष अष्टमी — भैरव जयंती। इस दिन साधना का फल हजार गुणा।

2प्रत्येक शनिवार

शनिवार — शनि और भैरव दोनों की उपासना का दिन। रात्रि में विशेष।

3अमावस्या की रात्रि

भैरव-काली साधना के लिए सर्वोत्तम। अंधकार में शक्ति का प्रवाह अधिकतम।

4चतुर्दशी (14वीं तिथि)

शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष की चतुर्दशी — शिव-भैरव को प्रिय।

5निशीथ काल (रात्रि 12 बजे के बाद)

तंत्र में निशीथ काल = शक्ति का चरम समय। भैरव साधना के लिए विशेष।

दिशा

भैरव पूजा में — उत्तर या पूर्व मुख।

वर्जित

सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच का 'संध्या काल' — भैरव साधना के लिए नहीं।

शिव पुराण

भैरव = काशी के क्षेत्रपाल — जो भी काशी में भैरव की उपासना करे, उसे काशी-लाभ मिलता है।

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शास्त्रीय स्रोत
भैरव तंत्र, शिव पुराण — भैरव महिमा
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