विस्तृत उत्तर
भैरव साधना के शुभ समय का वर्णन भैरव तंत्र और शिव पुराण में है:
सर्वश्रेष्ठ समय
1भैरव अष्टमी
मार्गशीर्ष (अगहन) माह कृष्ण पक्ष अष्टमी — भैरव जयंती। इस दिन साधना का फल हजार गुणा।
2प्रत्येक शनिवार
शनिवार — शनि और भैरव दोनों की उपासना का दिन। रात्रि में विशेष।
3अमावस्या की रात्रि
भैरव-काली साधना के लिए सर्वोत्तम। अंधकार में शक्ति का प्रवाह अधिकतम।
4चतुर्दशी (14वीं तिथि)
शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष की चतुर्दशी — शिव-भैरव को प्रिय।
5निशीथ काल (रात्रि 12 बजे के बाद)
तंत्र में निशीथ काल = शक्ति का चरम समय। भैरव साधना के लिए विशेष।
दिशा
भैरव पूजा में — उत्तर या पूर्व मुख।
वर्जित
सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच का 'संध्या काल' — भैरव साधना के लिए नहीं।
शिव पुराण
भैरव = काशी के क्षेत्रपाल — जो भी काशी में भैरव की उपासना करे, उसे काशी-लाभ मिलता है।





