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काली पूजा📜 काली पूजा परंपरा, बंगाल1 मिनट पठन

काली पूजा में रात को दीपदान का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

अंधकार→प्रकाश = अज्ञान नाश। अमावस्या + दीपक = काली कृपा। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय।' काली = बाहर अंधकार, भीतर ज्योति। 14 दीपक, सरसों तेल/घी, चारों कोनों + द्वार।

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विस्तृत उत्तर

काली पूजा में रात्रि दीपदान:

महत्व

  1. 1अंधकार → प्रकाश: काली = अंधकार/काल की देवी। दीप = ज्ञान। अंधकार में दीप = अज्ञान नाश।
  2. 2दीपावली + काली पूजा: बंगाल में दीपावली अमावस्या = काली पूजा। अमावस्या (अंधेरी रात) + असंख्य दीपक = काली कृपा।
  3. 3आत्मा का प्रकाश: 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' — अंधकार से प्रकाश की ओर।
  4. 4काली = ज्योतिस्वरूपा: बाहर काली (अंधकार), भीतर ज्योति (ज्ञान) — दीपक = इस ज्योति का प्रतीक।

विधि: 14 दीपक (चतुर्दशी) या असंख्य। सरसों तेल/घी। घर के चारों कोनों + द्वार पर।

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शास्त्रीय स्रोत
काली पूजा परंपरा, बंगाल
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