विस्तृत उत्तर
महाकाली के बीज मंत्र तंत्र शास्त्र और महाकाल संहिता में विस्तार से वर्णित हैं:
1काली का मूल बीज मंत्र
> क्रीं (Kreem)
'क्रीं' काली का एकाक्षरी बीज है — यह सर्वाधिक शक्तिशाली और केंद्रीय बीज है:
- ▸'क' = काली शक्ति
- ▸'र' = ब्रह्मांडीय अग्नि
- ▸'ई' = महाशक्ति
- ▸'अनुस्वार (ं)' = दुःख निवारण
2षडाक्षरी काली मंत्र (सर्वाधिक प्रचलित)
> ॐ क्रीं कालिकायै नमः
3दशाक्षरी काली मंत्र
> ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
यह महातंत्र का महामंत्र है — अत्यंत शक्तिशाली।
4काली गायत्री मंत्र
> ॐ महाकाल्यै च विद्महे श्मशानवासिन्यै धीमहि।
> तन्नो काली प्रचोदयात्॥
5काली नवार्ण मंत्र (दुर्गा सप्तशती से)
> ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे
(इसमें 'क्लीं' महाकाली का बीज है)
बीजों का तात्विक अर्थ
- ▸क्रीं = काली बीज — परिवर्तन और विनाश की शक्ति
- ▸ह्रीं = माया बीज — शक्ति का संचालन
- ▸हूं = शिव बीज — रक्षा और क्रोध शमन
- ▸क्लीं = काम बीज — आकर्षण शक्ति
मंत्र चयन
- ▸नित्य पूजा: 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः'
- ▸विशेष साधना: दशाक्षरी मंत्र (गुरु दीक्षा के बाद)
- ▸ध्यान: काली गायत्री
गुरु दीक्षा: दशाक्षरी और उच्च तांत्रिक मंत्र बिना गुरु दीक्षा के नहीं जपने चाहिए।

