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मंत्र सिद्धि⏱ 2 मिनट पठन

महामृत्युंजय मंत्र सिद्धि कैसे करें?

महामृत्युंजय = 33 अक्षर → पुरश्चरण = 33 लाख। रुद्राक्ष माला अनिवार्य। सोमवार, महाशिवरात्रि, ग्रहण काल विशेष। हवन: तिल-जौ-दूर्वा-घी।

संक्षिप्त उत्तर

महामृत्युंजय = 33 अक्षर → पुरश्चरण = 33 लाख। रुद्राक्ष माला अनिवार्य। सोमवार, महाशिवरात्रि, ग्रहण काल विशेष। हवन: तिल-जौ-दूर्वा-घी। रोगी की ओर से परिवार भी कर सकता है। ध्यान: त्र्यम्बक शिव — तीन नेत्र, चंद्रमौलि। सिद्धि: शरीर में उष्णता, स्वप्न में नीलकंठ दर्शन।

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विस्तृत उत्तर

महामृत्युंजय मंत्र — मृत्यु और रोग पर विजय का महामंत्र — की सिद्धि:

महामृत्युंजय मंत्र (यजुर्वेद 3.60)

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।'

— अर्थ: हम त्र्यम्बक (तीन नेत्रों वाले शिव) की पूजा करते हैं जो सुगंधित और पोषणकर्ता हैं। हमें ककड़ी की भांति मृत्यु के बंधन से मुक्त करें — अमृत से नहीं।

मंत्र में 33 अक्षर → पुरश्चरण = 33 लाख जप।

सिद्धि की सम्पूर्ण विधि (शिव पुराण + मंत्रमहार्णव)

1उचित काल

  • ▸सोमवार — महामृत्युंजय जप के लिए विशेष (शिव-वार)
  • ▸ब्रह्ममुहूर्त — सर्वोत्तम
  • ▸महाशिवरात्रि — वर्ष में एक बार — इस दिन जप का फल अनंत
  • ▸सूर्यग्रहण/चंद्रग्रहण — अत्यंत शक्तिशाली

2सामग्री

  • ▸माला: रुद्राक्ष माला — अनिवार्य। महामृत्युंजय में रुद्राक्ष ही मान्य।
  • ▸वस्त्र: सफेद या भस्म-वर्ण
  • ▸आसन: कुशासन या ऊनी
  • ▸दिशा: उत्तर या पूर्व मुख

3ध्यान-रूप (शिव पुराण)

त्र्यम्बक शिव — तीन नेत्र, चंद्रमौलि, जटाजूट, श्वेत वर्ण, शूल-डमरू-वरद-अभयमुद्रा — का ध्यान करें।

4जप-विधि

  • ▸प्रत्येक माला के साथ: 'ॐ त्र्यम्बकं...' पूर्ण मंत्र का स्पष्ट उच्चारण
  • ▸'मृत्योर्मुक्षीय' — यहाँ भाव करें कि मृत्यु-भय, रोग, और संकट दूर हो रहे हैं
  • ▸'माऽमृतात्' — मृत्यु से नहीं, अमृत (मोक्ष) से मुक्त न हो — यह नकारात्मक प्रार्थना नहीं, अपितु 'अमृत में बना रहने' का भाव है

5हवन सामग्री

रुद्रयामल: तिल, जौ, दूर्वा, और घी — प्रत्येक आहुति के साथ 'स्वाहा' जोड़कर हवन।

6विशेष उपयोग

  • ▸गंभीर रोगी के लिए: परिवार के सदस्य रोगी की ओर से जप करें
  • ▸दुर्घटना-भय: 11 माला नित्य
  • ▸अकाल मृत्यु-योग में: 1.25 लाख जप एक अनुष्ठान में

सिद्धि के संकेत

जप के दौरान शरीर में उष्णता, रोग में असाधारण सुधार, और स्वप्न में नीलकंठ शिव का दर्शन।

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