विस्तृत उत्तर
गणेश मंत्र सिद्धि — किसी भी साधना-आरंभ से पूर्व और स्वतंत्र साधना के रूप में:
गणेश के प्रमुख मंत्र
- 1षडाक्षर: 'ॐ गं गणपतये नमः' — सर्वसुलभ और सर्वशक्तिशाली
- 2गणपत्यथर्वशीर्ष: 'गणानां त्वा गणपतिं हवामहे...' — वैदिक स्तोत्र
- 3एकाक्षर बीज: 'गं' — गणपति का मूल बीज
- 4विनायक मंत्र: 'ॐ विघ्नराजाय नमः'
सिद्धि की विधि (गणेश पुराण + मुद्गल पुराण)
1उचित काल
- ▸बुधवार — गणपति का वार
- ▸भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी — गणेश चतुर्थी — वर्ष का सर्वोत्तम काल
- ▸प्रत्येक मास की शुक्ल चतुर्थी — विनायक चतुर्थी
- ▸ब्रह्ममुहूर्त — नित्य जप के लिए
2माला
रुद्राक्ष, मूंगा (लाल), या हरे रंग की माला — गणपति-परंपरा में उपयुक्त।
3वस्त्र
लाल वस्त्र — गणपति को लाल रंग प्रिय है।
4पुरश्चरण
'ॐ गं गणपतये नमः' (6 अक्षर) → 6 लाख जप
5ध्यान-रूप (गणपत्यथर्वशीर्ष)
एकदंत, गजमुख, लम्बोदर, चतुर्भुज — पाश, अंकुश, मोदक, और वरद — मूषकवाहन, रक्तवर्ण — गणपति का ध्यान।
6भोग
मोदक (गणपति के सर्वाधिक प्रिय), लड्डू, दूर्वा (21 या 108 दूर्वा अर्पण), लाल फूल।
7गणपत्यथर्वशीर्ष पाठ
नित्य 21 पाठ — गणेश मंत्र-सिद्धि में गणपत्यथर्वशीर्ष पाठ अत्यंत शक्तिशाली है।
8विशेष नियम
गणेश पुराण: किसी भी मंत्र-साधना आरंभ करने से पूर्व गणेश-पूजन अनिवार्य है — 'आदि देव' के रूप में। गणेश-सिद्धि से अन्य सभी साधनाओं में विघ्न दूर होते हैं।
सिद्धि के संकेत
जप में असाधारण शांति, मोदक या मूषक का स्वप्न, और कार्यों में विघ्न का स्वतः समाप्त होना।





