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योग निर्माण प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

योग निर्माण से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

नल योग में बुध और गुरु (बृहस्पति) ग्रहों का क्या रोल होता है?

जिन 4 राशियों में नल योग बनता है, उनके मालिक सिर्फ बुध और गुरु होते हैं। इसलिए इस योग में क्रूर ग्रहों का गुस्सा भी समझदारी और ज्ञान में बदल जाता है।

बुधगुरुबौद्धिक ग्रह
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क्या नल योग में राहु और केतु को गिना जाता है?

नहीं, राहु और केतु 'छाया ग्रह' हैं जिनका कोई भौतिक शरीर नहीं होता। इसलिए नल योग या किसी भी 'नाभस योग' में इन्हें नहीं गिना जाता है।

राहुकेतुछाया ग्रह
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कुंडली में नल योग कैसे बनता है?

जब कुंडली के सातों मुख्य ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) सिर्फ 3, 6, 9 या 12 नंबर की राशियों (द्विस्वभाव राशियों) में बैठे हों, तब नल योग बनता है।

नल योग निर्माणद्विस्वभाव राशियांग्रह स्थिति
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स्थान परिवर्तन योग क्या होता है?

जब 9वें भाव का मालिक 10वें भाव में बैठ जाए और 10वें भाव का मालिक 9वें भाव में बैठ जाए, तो इसे 'स्थान परिवर्तन महायोग' कहते हैं।

स्थान परिवर्तनमहायोगपरिवर्तन योग
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धर्म-कर्माधिपति योग कैसे बनता है?

यह योग 4 तरह से बनता है: 1. दोनों ग्रह जगह बदल लें, 2. दोनों एक साथ बैठ जाएं, 3. दोनों एक-दूसरे को देखें, या 4. दोनों एक-दूसरे के नक्षत्र में हों।

योग निर्माणसंबंधयुति और दृष्टि
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योग निर्माण — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर योग निर्माण श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

योग निर्माण को गहराई से समझने का तरीका

योग निर्माण प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।