विस्तृत उत्तर
यह इस योग का सबसे गहरा रहस्य है। चारों द्विस्वभाव राशियों (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) के मालिक सिर्फ दो ग्रह हैं— बुध (बुद्धि/तर्क) और गुरु (ज्ञान/धर्म)। इसलिए नल योग में मंगल, शनि या सूर्य जैसे क्रूर ग्रह भी जब बुध और गुरु के घर में बैठते हैं, तो उनका गुस्सा और अहंकार भी 'ज्ञान और कूटनीति' के सांचे में ढल जाता है।





