विस्तृत उत्तर
यदि कुंडली में लग्न (प्रथम भाव) या चन्द्रमा पर किसी अत्यंत बलवान, उच्च या स्वराशि के देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) की पूरी शुभ दृष्टि पड़ रही हो, या गुरु स्वयं लग्न में 'हंस योग' बना रहा हो, तो वह अपनी अमृतमयी दृष्टि से नल योग से मिलने वाली 'शारीरिक विकृति' के दोष को पूरी तरह नष्ट (दोष भंग) कर देता है।





