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विस्तृत उत्तर
ऋषि विश्वामित्र ने ही श्रीराम और लक्ष्मण को अनेक दिव्यास्त्रों की शिक्षा दी थी जिनमें आग्नेयास्त्र भी सम्मिलित था। यह शिक्षा उन्हें राक्षसों से यज्ञ की रक्षा करने और धर्म की स्थापना में सहायता करने के उद्देश्य से दी गई थी। यह गुरु-शिष्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जहाँ गुरु ने अपने शिष्य को न केवल अस्त्र-ज्ञान दिया बल्कि उसे धर्म की रक्षा के लिए भी तैयार किया।
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