ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
शिव रूप📜 दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद), दक्षिणामूर्ति स्तोत्र (आदि शंकराचार्य), सूतसंहिता (स्कन्द पुराण), शैव आगम2 मिनट पठन

दक्षिणामूर्ति शिव की उपासना का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

दक्षिणामूर्ति = शिव का परम गुरु स्वरूप। दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (यजुर्वेद): 24 अक्षर मंत्र। शंकराचार्य स्तोत्र: अद्वैत सार, 'मोक्ष शास्त्र'। मौन गुरु — वृद्ध शिष्यों के संशय छिन्न। गुरु न मिले तो इन्हें गुरु मानें। गुरुवार/गुरु पूर्णिमा विशेष। विद्यार्थियों के लिए बुद्धि वृद्धि।

📖

विस्तृत उत्तर

दक्षिणामूर्ति भगवान शिव का 'परम गुरु' स्वरूप है — ज्ञान, योग, संगीत और शास्त्रों के आदि शिक्षक। 'दक्षिणामूर्ति' नाम इसलिए कि वे दक्षिण (दक्षिण दिशा) की ओर मुख करके ऋषियों को ज्ञान देते हैं।

शास्त्रीय आधार

दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद)

मार्कण्डेय ऋषि ने शौनकादि मुनियों को बताया कि दक्षिणामुख शिव का प्रकटीकरण ही परम रहस्यमय शिवतत्त्व का ज्ञान है। 24 अक्षर का दक्षिणामूर्ति मंत्र: 'ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा।'

दक्षिणामूर्ति स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)

शंकराचार्य रचित यह स्तोत्र अद्वैत वेदांत का सार है। इसमें कहा गया: 'चित्रं वटतरोर्मूले वृद्धाः शिष्या गुरुर्युवा। गुरोस्तु मौनं व्याख्यानं शिष्यास्तु छिन्नसंशयाः।।' — वट वृक्ष के नीचे युवा गुरु (दक्षिणामूर्ति) मौन हैं, किन्तु वृद्ध शिष्यों के सभी संशय छिन्न हो गए। इसे 'मोक्ष शास्त्र' भी कहा गया है।

सूतसंहिता (स्कन्द पुराण)

दक्षिणामूर्ति के चार शिष्य — सनक, सनन्दन, सनातन, सनतकुमार — जिन्हें मौन में ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त हुआ।

महत्व

  1. 1गुरु प्राप्ति: शास्त्रों के अनुसार जिसे सद्गुरु न मिले, वह दक्षिणामूर्ति को गुरु मानकर साधना कर सकता है — योग्य होने पर मानव गुरु की प्राप्ति होगी।
  2. 2विद्या/बुद्धि वृद्धि: विद्यार्थियों के लिए विशेष — दक्षिणामूर्ति मंत्र जप से पढ़ाई-लिखाई में लाभ।
  3. 3आत्मज्ञान/मोक्ष: अद्वैत वेदांत का सर्वोच्च ज्ञान।
  4. 4गुरुवार (बृहस्पतिवार): दक्षिणामूर्ति पूजा का विशेष दिन।
  5. 5गुरु पूर्णिमा: दक्षिणामूर्ति वंदना का सर्वोत्तम अवसर।

गायत्री मंत्र

ॐ वृषभध्वजाय विद्महे घृणिहस्ताय धीमहि तन्नो दक्षिणामूर्तिः प्रचोदयात्।
📜
शास्त्रीय स्रोत
दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद), दक्षिणामूर्ति स्तोत्र (आदि शंकराचार्य), सूतसंहिता (स्कन्द पुराण), शैव आगम
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

दक्षिणामूर्तिगुरुज्ञानशंकराचार्यमौन

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

दक्षिणामूर्ति शिव की उपासना का क्या महत्व है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको शिव रूप से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद), दक्षिणामूर्ति स्तोत्र (आदि शंकराचार्य), सूतसंहिता (स्कन्द पुराण), शैव आगम पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।