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विस्तृत उत्तर
योग में श्रद्धा इसलिए जरूरी है क्योंकि श्रद्धा के अभाव को योग का विघ्न बताया गया है। पाठ में योग के साधन, साध्य, गुरु, ज्ञान, आचार और भगवान् शिव आदि में चित्त की श्रद्धारहित वृत्ति को अश्रद्धा कहा गया है। यदि साधक का मन इन आधारों पर विश्वास नहीं रखता, तो साधना की दिशा कमजोर हो जाती है। इसलिए श्रद्धा योगमार्ग की स्थिरता और ग्रहणशीलता का आधार है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 51-52, श्लोक 6
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