धर्म और आचारसच्चा आचार्य कौन कहलाता है?जो स्वयं आचरण करता है, सबको आचार में लगाता है और शास्त्रार्थ का परिशीलन करता है, वही आचार्य है।#सच्चा आचार्य#आचरण#शास्त्र अर्थ
योग बाधाएँयोग में श्रद्धा क्यों जरूरी है?योग के साधन, साध्य, गुरु, ज्ञान, आचार और शिव में श्रद्धा न होना अश्रद्धा है, जो योग में बाधा बनती है।#श्रद्धा#अश्रद्धा#गुरु
पाशुपत अस्त्र साधनासाधना काल में किन नैतिक नियमों का पालन करना चाहिए?साधक को सत्य, मौन, क्रोध त्याग और ईमानदारी जैसे सात्त्विक नियमों का पालन करना चाहिए।#नियम#आचार#शुद्धि
मंदिरमंदिर में पूजा के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?मंदिर में वर्जित: जोरदार बात, मोबाइल उपयोग, दौड़ना, देवता की ओर पीठ। बाएँ हाथ से अर्पण, जूठी वस्तु, टूटे पुष्प। देवता-निषेध वस्तु (तुलसी शिव को नहीं)। सूतक/पातक में प्रवेश नहीं (मनुस्मृति)। मंदिर में सौदेबाज़ी, भोजन, तंबाकू वर्जित। विष्णु स्मृति: अशुद्ध की पूजा निष्फल।#मंदिर#वर्जित#निषेध
मंदिरमंदिर में पूजा के नियम क्या हैं?मंदिर नियम: स्नान → स्वच्छ वस्त्र → जूते बाहर। शांत आचरण, मोबाइल बंद। बाएँ हाथ से अर्पण नहीं। टूटी/मुरझाई वस्तु नहीं। देवता-निषेध ध्यान में रखें। सूतक/पातक में न जाएँ (धर्मसिंधु)। मनुस्मृति: 'शुचिः पर्युपासीत' — पवित्रता सर्वोच्च नियम।#मंदिर#नियम#शुद्धि