विस्तृत उत्तर
मंदिर में पूजा के नियम आगम शास्त्रों, मनुस्मृति और धर्मसिंधु में विस्तार से वर्णित हैं।
मंदिर पूजा के मुख्य नियम
शारीरिक शुद्धि
- ▸स्नान किए बिना मंदिर न जाएँ (या कम-से-कम हाथ-मुँह धोएँ)
- ▸स्वच्छ वस्त्र अनिवार्य
- ▸जूते-चप्पल मंदिर-परिसर के बाहर उतारें
- ▸मासिक-धर्म काल में मंदिर-प्रवेश से बचें (परंपरागत नियम)
आचरण-नियम
- ▸मंदिर में शांत और विनम्र आचरण
- ▸जोर से बातें न करें
- ▸मोबाइल फोन साइलेंट या बंद रखें
- ▸दौड़ें नहीं, धीरे चलें
- ▸मंदिर-परिसर में खाना न खाएँ
पूजा-विधि नियम
- ▸देवता को अर्पण-सामग्री स्वयं के अनुसार चुनें (देवता-निषेध ध्यान में रखें)
- ▸बिल्कुल बाएँ हाथ से कभी अर्पण न करें
- ▸टूटी/मुरझाई वस्तु न चढ़ाएँ
- ▸पूजा में मन को केंद्रित रखें
दर्शन-नियम
- ▸मूर्ति के सामने कुछ देर ध्यान से देखें — दर्शन का अर्थ 'देखना' है
- ▸गर्भगृह में अधिक समय न रोकें यदि अन्य भक्त प्रतीक्षा में हों
- ▸परिक्रमा देवता-अनुसार करें
सूतक/पातक नियम
धर्मसिंधु: घर में जन्म (10 दिन) या मृत्यु (13 दिन) अशौच हो तो मंदिर न जाएँ।
मनुस्मृति: 'शुचिः पर्युपासीत।' — पवित्र होकर उपासना करें — यही सर्वोच्च नियम है।





