विस्तृत उत्तर
मंदिर में पूजा के समय का विधान आगम शास्त्रों की 'पंचकाल-पद्धति' में विस्तार से दिया गया है।
आगम शास्त्र — पंचकाल-पद्धति
बड़े मंदिरों (विशेषतः वैष्णव) में पाँच समय की पूजा अनिवार्य:
| पूजा-काल | समय | विशेष क्रिया |
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| अभिगमन | सूर्योदय | मंदिर-द्वार खुलना, मंगल-आरती |
| उपादान | प्रातः 8-9 बजे | पुष्प-संग्रह, पूजा-सामग्री तैयारी |
| इज्या | प्रातः 10-11 बजे | मुख्य पूजा, नैवेद्य |
| स्वाध्याय | दोपहर | मंत्र-पाठ, विश्राम |
| योग | सायं | सायं-आरती, भोग |
विशेष पूजा-काल
1ब्रह्म मुहूर्त (सर्वोत्तम)
सूर्योदय से 1.5 घंटे पूर्व। सात्विक ऊर्जा सर्वाधिक।
2संध्या-काल
सूर्यास्त के समय — विशेषतः शिव और सूर्य पूजा के लिए।
3रात्रि-पूजा
धर्मसिंधु: शिव, काली, भैरव — रात्रि में विशेष पूजा।
सामान्य भक्त के लिए
स्वयं के लिए उचित समय — सुबह मंदिर जाना सर्वोत्तम। सायंकाल भी उचित।
वर्जित काल
राहु काल, गुलिक काल में मंदिर जाना कुछ परंपराओं में निषिद्ध।





