विस्तृत उत्तर
मंदिर में तिलक लगाने का आध्यात्मिक और ऊर्जा-संबंधी आधार आगम शास्त्रों और पुराणों में वर्णित है।
शास्त्रीय आधार
स्कंद पुराण: 'तिलकेन विना यस्तु पूजां करोति दुर्मतिः। अफलं तस्य तत्सर्वं प्रतिगृह्णाति केशवः।' — तिलक के बिना पूजा करने वाले का फल नष्ट होता है।
तिलक क्यों लगाते हैं
1आज्ञाचक्र का सक्रियण
आगम शास्त्र: मस्तक का मध्य-बिंदु (भौहों के बीच) = आज्ञाचक्र। यह बिंदु देवता-ऊर्जा ग्रहण का केंद्र है। तिलक लगाना = इस केंद्र को सक्रिय करना।
2देवता-पहचान
विष्णु पुराण: तिलक का आकार देवता-परिचय देता है:
- ▸ऊर्ध्व-पुंड्र (U आकार) = वैष्णव
- ▸त्रिपुंड्र (तीन रेखाएँ) = शैव
- ▸लाल बिंदु = शाक्त
3सुरक्षा-कवच
शिव पुराण: भस्म का त्रिपुंड्र = शिव-सुरक्षा। चंदन का तिलक = विष्णु-सुरक्षा। यह नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।
4मंगल-भाव
तिलक = मांगलिक प्रारंभ का संकेत। किसी कार्य से पूर्व तिलक = देवता का आशीर्वाद ग्रहण।
5शीतलता और एकाग्रता
चंदन तिलक = मस्तक को शीतल रखता है → एकाग्रता बढ़ती है। यह ध्यान में सहायक।





