विस्तृत उत्तर
मंदिर में पूजा की विधि आगम शास्त्रों और पुराणों में चरणबद्ध रूप से वर्णित है।
मंदिर-पूजा की संपूर्ण विधि
1प्रवेश-पूर्व
- ▸जूते-चप्पल बाहर उतारें
- ▸हाथ-पैर धोएँ
- ▸मन में भगवान का स्मरण करते हुए प्रवेश करें
2द्वारपाल-वंदन
मंदिर के द्वार पर जय-विजय (विष्णु मंदिर) या नंदी (शिव मंदिर) को प्रणाम करें। आगम शास्त्र: मुख्य देवता के पूर्व द्वारपालों का वंदन अनिवार्य।
3घंटी बजाएँ
मंदिर-प्रवेश पर घंटी बजाना — देवता को अपनी उपस्थिति की सूचना।
4पंचोपचार या षोडशोपचार
सामान्य दर्शन में: पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, नमस्कार (पंचोपचार)।
विशेष पूजा में: षोडशोपचार (16 सेवाएँ)।
5दर्शन-विधि
- ▸मूर्ति के सामने खड़े होकर दोनों हाथ जोड़ें
- ▸आँखें खोलकर मूर्ति को देखें — यही साक्षात् दर्शन
- ▸मन में इष्ट का ध्यान करें
- ▸'ॐ नमः शिवाय' या इष्ट-मंत्र का जप करें
6पुष्प, बिल्वपत्र, अक्षत अर्पण
संबंधित देवता के अनुसार अर्पण-सामग्री।
7दीप-धूप
धूपबत्ती और दीप जलाकर अर्पित करें।
8नैवेद्य/प्रसाद
लाया हुआ प्रसाद देवता को अर्पित करें।
9आरती में सम्मिलित हों
आरती के समय उपस्थित रहें।
10परिक्रमा और प्रणाम
परिक्रमा करें, साष्टांग या पंचांग प्रणाम करें।
धर्मसिंधु: दर्शन का फल भाव पर निर्भर है — शुद्ध भाव से किया छोटा दर्शन भी महान फल देता है।





