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मंदिर📜 आगम शास्त्र (कामिकागम), शिव पुराण, विष्णु पुराण, धर्मसिंधु2 मिनट पठन

मंदिर में पूजा कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

मंदिर पूजा विधि: जूते उतारें → हाथ-पैर धोएँ → द्वारपाल-वंदन → घंटी बजाएँ → दर्शन (दोनों हाथ जोड़कर, आँखें खोलकर) → पुष्प/अक्षत अर्पण → धूप-दीप → नैवेद्य → आरती → परिक्रमा → साष्टांग प्रणाम। धर्मसिंधु: शुद्ध भाव = सर्वोत्तम पूजा।

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विस्तृत उत्तर

मंदिर में पूजा की विधि आगम शास्त्रों और पुराणों में चरणबद्ध रूप से वर्णित है।

मंदिर-पूजा की संपूर्ण विधि

1प्रवेश-पूर्व

  • जूते-चप्पल बाहर उतारें
  • हाथ-पैर धोएँ
  • मन में भगवान का स्मरण करते हुए प्रवेश करें

2द्वारपाल-वंदन

मंदिर के द्वार पर जय-विजय (विष्णु मंदिर) या नंदी (शिव मंदिर) को प्रणाम करें। आगम शास्त्र: मुख्य देवता के पूर्व द्वारपालों का वंदन अनिवार्य।

3घंटी बजाएँ

मंदिर-प्रवेश पर घंटी बजाना — देवता को अपनी उपस्थिति की सूचना।

4पंचोपचार या षोडशोपचार

सामान्य दर्शन में: पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, नमस्कार (पंचोपचार)।

विशेष पूजा में: षोडशोपचार (16 सेवाएँ)।

5दर्शन-विधि

  • मूर्ति के सामने खड़े होकर दोनों हाथ जोड़ें
  • आँखें खोलकर मूर्ति को देखें — यही साक्षात् दर्शन
  • मन में इष्ट का ध्यान करें
  • 'ॐ नमः शिवाय' या इष्ट-मंत्र का जप करें

6पुष्प, बिल्वपत्र, अक्षत अर्पण

संबंधित देवता के अनुसार अर्पण-सामग्री।

7दीप-धूप

धूपबत्ती और दीप जलाकर अर्पित करें।

8नैवेद्य/प्रसाद

लाया हुआ प्रसाद देवता को अर्पित करें।

9आरती में सम्मिलित हों

आरती के समय उपस्थित रहें।

10परिक्रमा और प्रणाम

परिक्रमा करें, साष्टांग या पंचांग प्रणाम करें।

धर्मसिंधु: दर्शन का फल भाव पर निर्भर है — शुद्ध भाव से किया छोटा दर्शन भी महान फल देता है।

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शास्त्रीय स्रोत
आगम शास्त्र (कामिकागम), शिव पुराण, विष्णु पुराण, धर्मसिंधु
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