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मंदिर📜 विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, मनुस्मृति, आगम शास्त्र2 मिनट पठन

मंदिर में परिक्रमा क्यों की जाती है?

संक्षिप्त उत्तर

परिक्रमा क्यों: विष्णु पुराण: 'प्रत्येक पग पर जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट।' आगम शास्त्र: देव-ऊर्जा-क्षेत्र में भ्रमण। स्कंद पुराण: ब्रह्माण्डीय गति का अनुसरण। विनम्रता (देवता = केंद्र)। संख्या: शिव-अर्धपरिक्रमा, विष्णु-4, गणेश-3, दुर्गा-1 या 3।

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विस्तृत उत्तर

परिक्रमा (प्रदक्षिणा) का महत्त्व और उसके कारण विष्णु पुराण तथा आगम शास्त्रों में विस्तार से वर्णित हैं।

प्रदक्षिणा का अर्थ

प्रदक्षिणा' = 'प्र' (विशेष) + 'दक्षिण' (दाहिनी ओर)। देवता को अपनी दाहिनी ओर रखते हुए घूमना।

शास्त्रीय प्रमाण

विष्णु पुराण: 'यानि कानि च पापानि जन्मांतरकृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यंति प्रदक्षिणपदे पदे।।' — परिक्रमा के प्रत्येक पग पर जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं।

परिक्रमा के पाँच कारण

1देव-ऊर्जा का चक्र

आगम शास्त्र: मंदिर की मूर्ति के चारों ओर देवता की ऊर्जा-तरंगें होती हैं। परिक्रमा = उस ऊर्जा-क्षेत्र में भ्रमण। यह ऊर्जा शरीर और मन दोनों पर प्रभाव डालती है।

2ब्रह्माण्डीय गति का अनुसरण

स्कंद पुराण: सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की परिक्रमा, पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की परिक्रमा — परमात्मा के चारों ओर जीव की परिक्रमा उसी नियम का अनुसरण है।

3पाप-क्षय

विष्णु पुराण: प्रत्येक कदम पर पाप नष्ट।

4विनम्रता

देवता को केंद्र में रखकर घूमना = 'आप केंद्र हैं, मैं आपके चारों ओर हूँ।' — अहंकार का विसर्जन।

5मंत्र-ऊर्जा का संचय

परिक्रमा के दौरान मंत्र-जप = घूमते हुए मंत्र-ऊर्जा का संचय।

परिक्रमा-संख्या

शिव — अर्धपरिक्रमा (जलधारी पार न करें)। विष्णु — 4। सूर्य — 7। गणेश — 3। दुर्गा — 1 या 3।

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शास्त्रीय स्रोत
विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, मनुस्मृति, आगम शास्त्र
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