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परिक्रमा प्रश्नोत्तरी — 16 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित परिक्रमा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 16 प्रश्न

लोक

महर्लोक के श्लोक 'यथा मेढीस्तम्भ' का तात्विक अर्थ क्या है?

यथा मेढीस्तम्भ श्लोक (भागवत ५.२३.३) कहता है — जैसे खंभे से बंधे पशु परिक्रमा करते हैं वैसे ही सभी ग्रह-नक्षत्र ध्रुवलोक के चारों ओर कल्पांत तक परिक्रमा करते हैं। महर्लोक इस चक्र से परे है।

यथा मेढीस्तम्भभागवत 5.23.3ध्रुवलोक
मंदिर ज्ञान

मंदिर में परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए?

देवी=1, विष्णु=4, गणेश/हनुमान=3, शिव=आधी (सोमसूत्र)। पीपल=11/21। विषम शुभ। शिव: जलप्रणालिका न लांघें → आधी।

परिक्रमाकितनीसंख्या
शिव मंदिर

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की परिक्रमा कैसे करें?

ॐ आकार मांधाता द्वीप, नर्मदा मध्य। 2 ज्योतिर्लिंग: ओंकारेश्वर + ममलेश्वर — दोनों दर्शन अनिवार्य। पंचक्रोशी परिक्रमा ~7 किमी (पक्का मार्ग)। 3 दिन पूर्ण यात्रा। नर्मदा स्नान अनिवार्य। शिव प्रतिदिन रात्रि शयन यहीं।

ओंकारेश्वरपरिक्रमाज्योतिर्लिंग
दिव्यास्त्र

मेघनाद ने लक्ष्मण पर वैष्णवास्त्र चलाया तो क्या हुआ?

मेघनाद का वैष्णवास्त्र लक्ष्मण की परिक्रमा करके वापस लौट आया क्योंकि लक्ष्मण जी स्वयं विष्णु के अंश आदिशेष के अवतार थे।

मेघनादलक्ष्मणवैष्णवास्त्र
लोक

महाराज प्रियव्रत ने रात्रि का अंधकार मिटाने के लिए क्या किया?

महाराज प्रियव्रत ने सूर्य के रथ का पीछा करते हुए अपने तेजोमय रथ पर सवार होकर पृथ्वी की सात बार परिक्रमा की ताकि रात्रि का अंधकार मिट सके।

प्रियव्रतरात्रिसूर्य
पूजन विधि

तुलसी विवाह में फेरे (सप्तपदी) कैसे होते हैं?

सप्तपदी: शालिग्राम को हाथों में उठाकर तुलसी की 7 बार परिक्रमा। फेरों के बाद शालिग्राम को तुलसी के बायीं ओर स्थापित करें (वामांगी = पत्नी का प्रतीक)। फिर तुलसी की माँग में सिंदूर अर्पण।

तुलसी सप्तपदीसात फेरेपरिक्रमा
पूजन विधि

वाहन की परिक्रमा (प्रदक्षिणा) कितनी बार करते हैं?

वाहन की प्रदक्षिणा: घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में 3 या 7 बार। हाथ में अक्षत लेकर मंत्र पाठ करते हुए। यह वाहन के चारों ओर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का सुरक्षात्मक चक्र बनाता है।

वाहन प्रदक्षिणापरिक्रमाघड़ी सुई दिशा
सुमेरु और ब्रह्म ग्रंथि

जप में सुमेरु को क्यों नहीं लांघते?

सुमेरु को नहीं लांघते क्योंकि साधना का उद्देश्य गुरु से 'आगे निकलना' नहीं बल्कि निरंतर उनकी परिक्रमा करना है — यह नियम विनम्रता सिखाता है और बोध कराता है कि अनंत की यात्रा स्वयं अनंत है।

मेरु उल्लंघन निषेधगुरु सम्मानकृतज्ञता
षोडशोपचार पूजा

षोडशोपचार पूजा में प्रदक्षिणा क्या होती है?

षोडशोपचार में प्रदक्षिणा/नमस्कार = परिक्रमा करना और साष्टांग प्रणाम कर क्षमा मांगना — यह पूजा का सोलहवाँ और अंतिम उपचार है।

प्रदक्षिणापरिक्रमासाष्टांग प्रणाम
गृह आचार एवं पूजा विधि

तुलसी की परिक्रमा कैसे करें?

दाहिनी ओर से (clockwise) तीन परिक्रमाएं करें, मंत्र बोलें। रविवार और एकादशी को तुलसी का स्पर्श वर्जित है।

तुलसीपरिक्रमापूजा विधि
वृक्ष पूजा

पीपल की परिक्रमा कब और कैसे करें

पीपल परिक्रमा सूर्योदय के बाद प्रातःकाल करें, विशेषकर शनिवार को। 7 परिक्रमा सामान्य विधान है, 108 सर्वोत्तम। दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) परिक्रमा करें। स्टील/पीतल के लोटे से जल में काली तिल-चावल मिलाकर चढ़ाएँ। गीता (10.26): 'अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्'। शनि दोष, पितृ दोष निवारण होता है।

पीपलपरिक्रमाशनि दोष
मंदिर साधना

मंदिर में दर्शन की सही विधि क्या है?

दर्शन विधि: जूते उतारें → दाएं पैर प्रवेश → घण्टी (1 बार) → ध्वज स्तम्भ प्रणाम → गर्भगृह: चरण→नाभि→हृदय→मुख→नेत्र (Eye Contact = चरम) → प्रणाम → परिक्रमा (दक्षिणावर्त) → प्रसाद/तीर्थ → पीठ न दिखाएँ। भाव: 'भगवान मुझे देख रहे हैं' = दर्शन।

दर्शन विधिमूर्ति दर्शनगर्भगृह
मंदिर

मंदिर में परिक्रमा क्यों की जाती है?

परिक्रमा क्यों: विष्णु पुराण: 'प्रत्येक पग पर जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट।' आगम शास्त्र: देव-ऊर्जा-क्षेत्र में भ्रमण। स्कंद पुराण: ब्रह्माण्डीय गति का अनुसरण। विनम्रता (देवता = केंद्र)। संख्या: शिव-अर्धपरिक्रमा, विष्णु-4, गणेश-3, दुर्गा-1 या 3।

मंदिरपरिक्रमाप्रदक्षिणा
मंदिर ज्ञान

मंदिर में परिक्रमा किस दिशा में करनी चाहिए और क्यों?

दक्षिणावर्त (clockwise) — दाहिना कंधा देवता ओर। सूर्य गति, सकारात्मक ऊर्जा, यम दूर। शिव = आधी।

परिक्रमादिशादक्षिणावर्त
मंदिर ज्ञान

शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं करते — जलाधारी तक क्यों?

सोमसूत्र (जलाधारी जल मार्ग) = लांघना अशुभ। अभिषेक जल = शिव ऊर्जा। बाएं→जलाधारी→वापस→दाएं→जलाधारी→वापस = आधी (चंद्रकला)। स्वयंभू/घर = पूरी मान्य।

शिवलिंगपरिक्रमापूरी नहीं
शिव पूजा विधि

शिवलिंग की परिक्रमा अर्धचंद्राकार क्यों की जाती है, पूरी गोल क्यों नहीं?

शिवलिंग की अर्धचंद्राकार परिक्रमा इसलिए होती है क्योंकि सोमसूत्र (जलधारी) को लांघना शास्त्रों में वर्जित है। शिवलिंग से प्रवाहित जल में शिव-शक्ति की ऊर्जा होती है। बाईं ओर से आरंभ कर जलधारी तक जाएं, फिर विपरीत दिशा में लौटें — यह चंद्राकार प्रदक्षिणा कहलाती है। शिव मूर्ति की पूरी परिक्रमा हो सकती है, शिवलिंग की नहीं।

परिक्रमाअर्धचंद्राकारशिवलिंग

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।