विस्तृत उत्तर
जप का सबसे महत्वपूर्ण शास्त्रीय नियम है कि सुमेरु को कभी भी लांघा नहीं जाता।
इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ यह है कि साधना का उद्देश्य गुरु या ईश्वर से 'आगे निकलना' नहीं, बल्कि निरंतर उनकी परिक्रमा करते हुए उनकी सेवा में लगे रहना है।
एक चक्र का पूर्ण होना साधना की एक मंजिल है, अंत नहीं।
सुमेरु को न लांघने का नियम हमें विनम्रता सिखाता है और यह बोध कराता है कि अनंत की यात्रा स्वयं अनंत है।





