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पूजा विधि📜 विष्णु पुराण — क्षमा प्रार्थना, धर्म सिंधु, भक्ति परंपरा1 मिनट पठन

पूजा के बाद भगवान को धन्यवाद कैसे दें?

संक्षिप्त उत्तर

धन्यवाद कैसे: क्षमा प्रार्थना ('अपराधसहस्राणि...'), कृतज्ञता ('जीवन-परिवार-स्वास्थ्य के लिए धन्यवाद'), फलार्पण ('इस पूजा का फल भगवान को'), साष्टांग प्रणाम, आत्मनिवेदन। संस्कृत न आए तो हिंदी में — भगवान सब समझते हैं।

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विस्तृत उत्तर

भगवान को धन्यवाद देने की विधि धर्म सिंधु और विष्णु पुराण में वर्णित है:

1क्षमा प्रार्थना (सर्वाधिक महत्वपूर्ण)

> 'अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

> दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।'

— हे परमेश्वर, मैं दिन-रात हजारों अपराध करता हूँ — मुझे अपना दास समझकर क्षमा करें।

2कृतज्ञता प्रार्थना

हिंदी में भी — 'हे भगवान, आपने मुझे जीवन, परिवार, स्वास्थ्य और यह पूजा का अवसर दिया — धन्यवाद।'

3फलार्पण

यत्किंचित् पूजाफलं भवेत् तत् सर्वं भगवते अर्पणमस्तु।' — इस पूजा का जो भी फल हो — वह भगवान को ही अर्पित हो।

4साष्टांग प्रणाम

आठ अंगों से प्रणाम — सर्वोच्च कृतज्ञता का प्रतीक।

5आत्मनिवेदन

नवधा भक्ति का नवम अंग — 'आत्मनिवेदन' — 'मैं अपने आप को भगवान के चरणों में समर्पित करता हूँ।'

सरल और हृदयस्पर्शी

संस्कृत न आए तो हिंदी में — भगवान के सामने खुलकर बात करें — वे समझते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
विष्णु पुराण — क्षमा प्रार्थना, धर्म सिंधु, भक्ति परंपरा
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