विस्तृत उत्तर
माला के 108 मनकों के अतिरिक्त एक और बड़ा व भिन्न मनका होता है, जिसे 'सुमेरु' या 'गुरु-मनका' कहा जाता है।
सुमेरु पर्वत की भांति यह सर्वोच्च शिखर का प्रतीक है, जो साक्षात गुरु-तत्व, परब्रह्म या उस आध्यात्मिक लक्ष्य का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे साधक प्राप्त करना चाहता है।
सुमेरु को न लांघने का नियम हमें विनम्रता सिखाता है और यह बोध कराता है कि अनंत की यात्रा स्वयं अनंत है।





