विस्तृत उत्तर
माला में सुमेरु (मेरु मणि) वह मुख्य बड़ा मनका होता है जहां से माला की शुरुआत और अंत होता है। शास्त्रों में सुमेरु उल्लंघन (पार करना) निषिद्ध माना गया है।
सुमेरु उल्लंघन निषेध का कारण
- 1सुमेरु को गुरु का प्रतीक माना गया है। गुरु का उल्लंघन अपमान तुल्य है, इसलिए सुमेरु को पार करना वर्जित है।
- 2सुमेरु को मेरु पर्वत (ब्रह्मांड का केंद्र) का प्रतीक भी माना जाता है।
- 3मान्यता है कि सुमेरु उल्लंघन से जप का संचित फल नष्ट या कम हो जाता है।
सुमेरु उल्लंघन के दुष्परिणाम (शास्त्रानुसार)
- ▸जप का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
- ▸गुरु और मंत्र देवता का अपमान माना जाता है।
- ▸संचित जप शक्ति क्षीण होती है।
सही विधि
- 1जप शुरू सुमेरु के बगल वाले मनके से करें।
- 2अंगूठे और मध्यमा अंगुली से माला फेरते जाएं।
- 3जब एक माला (108 मनके) पूरी होकर सुमेरु तक पहुंचें, तो माला को उलटा पलट लें (reverse करें)।
- 4फिर उसी दिशा में वापस जपते जाएं जिधर से आए थे।
- 5कभी भी सुमेरु को लांघकर आगे न बढ़ें।
ध्यान रखें
- ▸माला को नाभि से ऊपर और नाक से नीचे रखें।
- ▸माला को गोमुखी (कपड़े की थैली) में रखकर जप करें ताकि किसी की दृष्टि न पड़े।
- ▸एक माला (108 मनके) पूरी होने से पहले बीच में बोलना, देखना या इशारे करना वर्जित है।





