विस्तृत उत्तर
तंत्र-मार्ग में कोई भी साधना, विशेषकर शव-साधना जैसी कोटि की साधना, गुरु के बिना असंभव और आत्मघाती है।
यहाँ गुरु केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि साक्षात शिव-स्वरूप हैं।
गुरु कोई व्यक्ति मात्र नहीं, अपितु एक सार्वभौमिक तत्त्व है, जो अज्ञान रूपी अंधकार ('गु') को ज्ञान रूपी प्रकाश ('रु') से नष्ट करता है।





