विस्तृत उत्तर
तंत्र-मार्ग में कोई भी साधना, विशेषकर शव-साधना जैसी कोटि की साधना, गुरु के बिना असंभव और आत्मघाती है।
गुरु के बिना मंत्र केवल शब्द हैं और साधना प्राणहीन क्रिया।
बिना गुरु के तंत्र साधना करने से क्या होता है को संदर्भ सहित समझें
बिना गुरु के तंत्र साधना करने से क्या होता है का सबसे सीधा सार यह है: बिना गुरु के तंत्र साधना असंभव और आत्मघाती है — गुरु के बिना मंत्र केवल शब्द मात्र रहते हैं और साधना प्राणहीन क्रिया बन जाती है।
गुरु तत्व और गुरु कृपा जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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तंत्र मार्ग में गुरु कौन होते हैं?
तंत्र मार्ग में गुरु केवल शिक्षक नहीं बल्कि साक्षात शिव-स्वरूप और एक सार्वभौमिक तत्त्व हैं — 'गु' = अज्ञान अंधकार, 'रु' = ज्ञान प्रकाश से नष्ट करने वाले।
'गुरु' शब्द का क्या अर्थ है?
'गुरु' शब्द का अर्थ: 'गु' = अज्ञान रूपी अंधकार, 'रु' = ज्ञान रूपी प्रकाश — गुरु वह सार्वभौमिक तत्त्व है जो अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से नष्ट करता है।
गुरु गीता में गुरु के बारे में क्या कहा गया है?
गुरु गीता (स्कंद पुराण): 'गुरुर्ब्रह्मागुरुर्विष्णुःगुरुर्देवोमहेश्वरः। गुरुःसाक्षात्परब्रह्म...' — गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश और साक्षात परब्रह्म हैं।
'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः' श्लोक का क्या अर्थ है?
'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' का अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश्वर हैं, गुरु ही साक्षात् परब्रह्म हैं — ऐसे श्रीगुरु को नमन।
सद्गुरु में कौन से दो गुण होने चाहिए?
सद्गुरु में दो गुण अनिवार्य हैं: (1) श्रोत्रिय — शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान, (2) ब्रह्मनिष्ठ — ब्रह्म का अपरोक्ष (साक्षात्) अनुभव।
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