का सरल उत्तर
बिना गुरु के तंत्र साधना असंभव और आत्मघाती है — गुरु के बिना मंत्र केवल शब्द मात्र रहते हैं और साधना प्राणहीन क्रिया बन जाती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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