विस्तृत उत्तर
एक सद्गुरु में शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान (श्रोत्रिय) और ब्रह्म का अपरोक्ष अनुभव (ब्रह्मनिष्ठ), दोनों गुण होते हैं।
सद्गुरु में दो गुण अनिवार्य हैं: (1) श्रोत्रिय — शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान, (2) ब्रह्मनिष्ठ — ब्रह्म का अपरोक्ष (साक्षात्) अनुभव।
एक सद्गुरु में शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान (श्रोत्रिय) और ब्रह्म का अपरोक्ष अनुभव (ब्रह्मनिष्ठ), दोनों गुण होते हैं।
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